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अभी एक्टिंग की दुकान खुली है: आसिफ शेख

अभी एक्टिंग की दुकान खुली है: आसिफ शेख

कॉमेडी सीरियल ‘यस बॉस’ के बॉस यानी आसिफ शेख छोटे पर्दे पर ज्यादातर हास्य भूमिकाओं में ही नजर आते हैं। आसिफ थिएटर में भी सक्रिय हैं और डायरेक्टर भी बनना चाहते हैं। उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश

आप हमेशा कॉमेडी सीरियल्स में ही नजर आते हैं। इनमें क्या आपको एक बंदिश-सी महसूस नहीं होती?
नहीं, बंदिश इसलिए महसूस नहीं होती क्योंकि मैं कॉमेडी बहुत एन्जॉय करता हूं। टेलीविजन पर तो मैं कॉमेडी ही करना चाहता हूं क्योंकि मुझे रोने-धोने वाले सीरियल न तो करना पसंद हैं और न ही देखना। कॉमेडी शोज में आप लोगों को हंसा पाते हैं, उनके चेहरे पर मुस्कान ला पाते हैं और मैं समझता हूं कि यह अपने-आप में एक बहुत बड़ी बात है।

आप फिल्में भी कर रहे हैं?
हां। कुछ अर्सा पहले ‘बेनी और बबलू’ आई थी और अभी हाल ही में मैंने ‘तंदूरी लव’ पूरी की है। साल में दो-तीन फिल्में कर लेता हूं। बस, इसी में खुश हूं।

फिल्मों में ज्यादा दिखाई न देने की वजह क्या है?
पहली और अहम वजह तो यही है कि मेरे पास ज्यादा वक्त ही नहीं होता है। अगर आप एक डेली-सीरियल कर रहे हैं तो महीने में 25 दिन तो आपके उसी में चले जाते हैं। फिर थिएटर भी है, आपकी फैमिली भी है, तो वक्त कहां से आएगा।
 
थिएटर अभी भी कर रहे हैं?
जी। थिएटर से मेरा जुड़ाव शुरू से ही रहा है और यह अभी तक कायम है। मैं इप्टा से जुड़ा हुआ हूं और लगातार शोज करता रहता हूं। पिछले दिनों मैं ‘काबुलीवाला’ कर रहा था। अभी मैं कैफी आजमी साहब का लिखा ‘आखिरी शमा’ कर रहा हूं जो हम काफी पहले किया करते थे और अब उसे दोबारा कर रहे हैं।
 
थिएटर करना क्या किसी रिफ्रेशर कोर्स करने जैसा नहीं होता?
हां, बिल्कुल। थिएटर को मैं एन्जॉय ही इसलिए करता हूं क्योंकि एक तो इसमें काम करने से अंदर के कलाकार को एनर्जी मिलती है और जब तुरंत सामने से ऑडियंस का रिएक्शन आता है तो लगता है कि कुछ बढ़िया काम किया है।

डायरेक्शन का भी इरादा है?
पूरा इरादा है। हर एक्टर का यह सपना होता है, कम से कम मेरा तो जरूर है। मैं फिल्में बनाना चाहूंगा, थिएटर के लिए शोज डायरेक्ट करना चाहूंगा, पर फिलहाल मेरी एक्टिंग की दुकान खुली हुई है तो अभी इसी को चला लूं। जब लगेगा कि यह दुकान बंद हो रही है तो मैं जरूर दूसरे रास्ते भी तलाशूंगा। हर चीज का टाइम होता है और मुझे लगता है कि डायरेक्शन का का टाइम अभी नहीं आया है। जब वक्त आएगा और लगेगा कि कुछ अच्छा ऑफर मिल रहा है तो इस बारे में जरूर सोचूंगा।

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