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खुद को दोहराना नहीं चाहती!

खुद को दोहराना नहीं चाहती!

सोहा अली खान अपने करियर में कई तरह के किरदार निभा चुकी हैं। संवेदनशील अभिनय करने के लिए जानी जाने वाली सोहा अली खान इन दिनों राजश्री ओझा की हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनी फिल्म चौराहे को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म व अपने करियर से जुड़ी दूसरी बातें सोहा ने अपने शब्दों में बांटीं।

जीवन की यात्रा की कहानी
फिल्म चौराहे साहित्यकार निर्मल वर्मा की कहानियों पर बनी है। अब तक इस तरह की फिल्में कम बनी हैं। यह फिल्म जिंदगी की प्रेम कहानी है, जिसमें यथार्थ भी है। यह फिल्म जीवन में मंजिल पाने की बजाय जीवन की यात्रा की बात करती है। फिल्म के किरदारों में कोई अजूबापन नहीं है, मगर भाषा का अंतर जरूर है। मैंने अपनी भाषा से इतर भाषा की फिल्म की है।

मैं निर्देशक की कलाकार हूं
चौराहे में मैं इरा बनी हूं। इरा एक युवा लड़की का किरदार है, जो कि निडर है। वह बुद्घिमान और अति आत्मविश्वासी है। पर उसके अंदर धैर्य नहीं है। बहुत ही अधीर किस्म की लड़की है। वह उस युवक को बदलना चाहती है, जिससे वह प्यार करती है। इरा आशावादी है और वह अपने प्रेमी को डिप्रेशन से उबारने में सफल भी होती है। इरा के किरदार को निभाने के लिए मुझे कोई खास तैयारी नहीं करनी पड़ी। मुझे तो कैमरे के सामने अपने अंदर की भावनाओं को सही ढंग से बाहर निकालने का ही प्रयास करना पड़ा। इसके अलावा मैंने वही किया,जो निर्देशक राजश्री ओझा ने मुझसे करने के लिए कहा। वैसे भी मैं निर्देशक की कलाकार हूं। इसीलिए मैंने कभी भी इमेज की परवाह नहीं की। मैंने खुद को किसी एक इमेज में बांधने का भी प्रयास नहीं किया।

फिल्म चुनते वक्त रुपयों पर भी ध्यान देती हूं
मुझे लगता है कि फिल्मों को चुनने का गुण मुझमें गॉड गिफ्टेड है। फिल्म की कहानी सुनते-सुनते ही मेरे दिमाग में आ जाता है कि मुझे यह फिल्म करनी है या नहीं। मुझे ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। पर यह कहना गलत होगा कि रुपयों की बात नहीं सोचती। हां, यह जरूर है कि कहानी व किरदार पहली प्राथमिकता होती है। इसके अलावा मेरी सोच यह है कि कोई भी फिल्म निर्देशक के विजन से बड़ी नहीं हो सकती, इसलिए निर्देशक के विजन को भी महत्व देती हूं। इसके बाद मैं निर्माता पर भी ध्यान देती हूं, क्योंकि अगर अच्छा व कामयाब निर्माता होगा तो फिल्म के सही ढंग से रिलीज होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, वरना हम अपनी तरफ से मेहनत करें और फिल्म सही ढंग से दर्शकों तक न पहुंचे तो हमारी सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।

संजना से रिलेट करती हूं मैं
अब तक मैंने जितने भी किरदार निभाए है ,उनमें से फिल्म तुम मिले का संजना का किरदार मेरी जिंदगी के काफी करीब रहा। हकीकत से रूबरू कराती इस फिल्म का हिस्सा बनकर मैं बेहद खुश हुई थी। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं अपने निजी जीवन के कई अनुभवों से दोबारा रूबरू हो पाई थी। संजना के किरदार और फिल्म में रिश्तों की जो जटिलता पेश की गई थी,उससे मैं पूरी तरह से रिलेट कर सकी थी। इसके अलावा फिल्म लाइफ गोज ऑन की दिया के किरदार को भी अपने करीब मानती हूं।

मां मेरी सबसे बड़ी आलोचक हैं
मेरी मां शर्मिला टैगोर मेरी सबसे बड़ी आलोचक हैं। वह मुझे बताती रहती हैं कि मेरा कौन-सा काम अच्छा है और कौन- सा खराब। पर मेरा भाई सैफ इतना व्यस्त है कि उसके पास मेरी तारीफ या मेरी आलोचना करने का भी वक्त नहीं है।

सुधीर मिश्र और रितुपर्णो घोष के साथ काम करने की ख्वाहिश
मैं अपने आपको किसी भी फिल्म में दोहराना नहीं चाहती। मैं हमेशा कुछ अलग करना चाहती हूं। मैंने जिस तरह की फिल्मों में अब तक काम नहीं किया है, वैसी फिल्में करना चाहूंगी। मुझे सुधीर मिश्र और रितुपर्णो घोष जैसे निर्देशकों के साथ काम करने में मजा आता है,क्योंकि ये फिल्मकार महिला पात्रों को प्रमुखता के साथ पेश करते हैं।

आने वाली फिल्में
फिल्म साहिब बीबी और गैंगस्टर-2 में काफी रोचक किरदार निभा रही हूं। इसमें एक युवा बिगड़ी हुई औलाद का किरदार है, जिसके चरित्र के कई शेड्स हैं। इसके अलावा एक फिल्म मिडनाइट चिल्ड्रन भी कर रही हूं। यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है।
निकिता त्रिपाठी

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