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रक्षा बजट में करीब 30 हजार करोड़ का उछाल

रक्षा बजट में करीब 30 हजार करोड़ का उछाल

रक्षा मंत्रालय को इस बार के बजट में 193407 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो पिछली बार के मुकाबले 13.15 प्रतिशत अधिक है हालांकि रक्षा बजट की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सेदारी अभी भी दो प्रतिशत से कम है।

अगले वित्त वर्ष का आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि रक्षा सेवाओं के लिए 193407 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 2011-12 में 170937 करोड़ रुपये का प्रावधान था।

भारत सरकार द्वारा 2012-13 में किए जाने वाले कुल खर्च में रक्षा क्षेत्र की रकम 12.97 प्रतिशत है और संपूर्ण परिव्यय में 113829 करोड़ रुपये राजस्व व्यय के लिए हैं जबकि शेष 79578.63 करोड रुपये पूंजीगत व्यय के लिए है।

रक्षा बजट जीडीपी का केवल 1.90 प्रतिशत है। लगातार दूसरी बार रक्षा बजट दो प्रतिशत से कम है। विशेषज्ञ सलाह देते आए हैं कि देश को रक्षा क्षेत्र में जीडीपी का कम से कम तीन प्रतिशत खर्च करना चाहिए ताकि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावशाली ढंग से मुकाबला किया जा सके।

भारतीय वायुसेना के लिए बड़ा सौदा साबित होने वाले 126 लडाकू विमानों के सौदे का बजट में अलग से कोई जिक्र नहीं है। बजट के बारे में मुखर्जी ने कहा कि आवंटन मौजूदा आवश्यकताओं पर आधारित है और भविष्य में अगर कुछ और जरूरत पड़ती है तो दिया जाएगा।

इस बीच अपने मंत्रालय के लिए और अधिक आवंटन की उम्मीद कर रहे रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने आवश्यकता पड़ने पर मदद का वायदा किया है। उन्होंने कहा कि रक्षा आधुनिकीकरण योजना जारी रहेगी।

आधुनिकीकरण योजनाओं पर बजट के असर के बारे में एंटनी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम अपनी सभी योजनाओं को आगे बढ़ाने में कामयाब होंगे। इस साल 197 हल्के हेलीकाप्टरों और 145 हल्की हावित्जर तोपों की खरीद की जानी है। मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर सहित लड़ाकू विमानों के उन्नयन के सौदों का भुगतान भी इसी साल होना है।
 
रक्षा मंत्रालय को आवंटित कुल 196407 करोड़ रुपये में से थल सेना को 78114.36 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि नौसेना को 12548.02 करोड़ रुपये और वायुसेना को 17705.81 करोड रुपये हासिल होंगे।

रक्षा अनुसंधन एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को 5995.56 करोड रुपये मिलेंगे। पिछले बजट में डीआरडीओ को 5386.01 करोड रुपये आवंटित किए गए थे। वित्त वर्ष के कुल पूंजीगत परिव्यय में से 32057.25 करोड रुपये तीनों सशस्त्र सेनाओं के लिए खरीदे जाने वाले विमानों और एयरो-इंजन के लिए होंगे।

 

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