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आईएमएफ-विश्व बैंक मदद देने को राजी

ारूरत पड़ने पर भारत विश्व बैंक और आईएमएफ जसी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं से 3अरब डॉलर का ऋण हासिल कर सकता है। यह जानकारी देते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने बताया कि वैश्विक वित्तीय संकट से उत्पन्न हालातों पर काबू पाने के लिए आईएमएफ से 30 अरब डॉलर का ऋण लेकर भारत इस कम शर्तो वाले ऋण से अल्पकालिक तरलता बढ़ा सकता है। इस ऋण को नौ माह में लौटाया जा सकता है। इसके साथ ही आहलूवालिया ने कहा कि हमार पास फिलहाल 200 अरब डॉलर का रिार्व है तो ऐसे में हमें इस ऋण की जरूरत नहीं है। मोंटेक सिंह ने यह भी बताया कि विश्व बैंक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए हर साल मिलने वाले 3 अरब डॉलर के खाते में से अरब डॉलर भी एक साथ ले सकता है। संकट से निपटने के लिए विश्व बैंक ने 100 अरब डॉलर का कोष तैयार कर रखा है। आईएमएफ और विश्व बैंक के प्रशासन में सुधार के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की पहल पर बुलाए गए जी-20 सम्मेलन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति बुश के साथ मुलाकात की। वहीं दूसरी तरफ वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम, मोंटेक सिंह आहलूवालिया और आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव अशोक चावला ने भी सदस्य देशों के आमंत्रित अतिथियों से मुलाकात की। इन लोगों ने अमेरिका ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बाारक ओबामा और उपराष्ट्रपति जो बिडेन की ओर से पूर्व मंत्री मेडेलीन अलब्राइट, पूर्व सांसद जिम लीश से भी मुलाकात की। इनसे भारतीय राजदूत रोनेन सेन ने भी मुलाकात की। हालांकि ओबामा के ऑफिस की ओर से कहा गया कि यह मुलाकात आधिकारिक नहीं थी।ं

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