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सरकार को रेल और आम बजट पारित कराने का भरोसा

सरकार को रेल और आम बजट पारित कराने का भरोसा

रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा संख्याबल कम होने के दावों को खारिज करते हुए सरकार ने गुरुवार को विश्वास जताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के साथ साथ रेल बजट और आम बजट भी सुगमता से पारित हो जाएगा।

मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने हालांकि आरोप लगाया कि संख्याबल जुटाने की कवायद में सरकार ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के जवाब को सोमवार तक टाला है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश यादव के शपथग्रहण समारोह में शामिल होकर लखनऊ से लौटे संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि सरकार को संख्या को लेकर कोई समस्या नहीं है।

बंसल ने कहा कि मुझे प्रस्ताव पारित करने में कोई कठिनाई नहीं दिखाई देती। कुछ करने की जरूरत नहीं है। सबकुछ ठीक है। तृणमूल कांग्रेस संप्रग का हिस्सा है। हमें रेल बजट और आम बजट पारित होने का भरोसा है।

बंसल से पूछा गया कि क्या उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा के साथ सपा का समर्थन मांगने के लिए लखनऊ भेजा गया क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के कदमों को लेकर सरकार चिंतित है। मंत्री ने कहा कि संप्रग के पास 274 की संख्या है और उसे सपा, बसपा तथा राजद का बाहर से समर्थन प्राप्त है। बंसल का बयान उस समय आया है जब विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने वक्तव्य दिया कि सरकार संकट में है।

सुषमा ने कहा कि भाजपा और राजग विशेष रूप से एनसीटीसी और केंद्र द्वारा संघीय ढांचे पर प्रहार के मुद्दे पर संशोधन लाने पर कायम हैं। एक केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार प्रस्ताव को सहजता से पारित कराएगी। उन्होंने कहा कि यदि संशोधन पारित भी हो जाते हैं तो इसका मतलब मामूली सी उलझन होगी और सरकार पर कोई गंभीर बोझ नहीं होगा।

उधर भाजपा का दावा है कि सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है और वह संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संशोधनों का सामना करने को टाल रही है। सुषमा स्वराज ने संवाद्दाताओं से कहा कि संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल इस बात पर तैयार हो गये थे कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा आज पूरी की जाए और उसके बाद संशोधन लिये जाएंगे और अभिभाषण पर वोटिंग होगी। हालांकि बाद में इस कसरत को सोमवार तक टाल दिया गया है।

सुषमा ने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष को इस बारे में सूचित करने का बुनियादी शिष्टाचार भी नहीं निभाया और अपनी योजनाओं के बारे में हमें अंधेरे में रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संकट में है। उसके पास संख्या की कमी है और वह उसे जुटाने के लिए समय ले रही है। उनके पास बहुमत नहीं है इसलिए कतरा रहे हैं। यदि सरकार के पास संशोधनों के साथ धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करने के लिए जरूरी संख्या नहीं है तो यह किस तरह की सरकार है।

मध्यावधि चुनाव की संभावनाओं के सवाल पर लोकसभा में विपक्ष की नेता ने कहा कि यदि मध्यावधि चुनाव होते हैं तो हम तैयार हैं। यह चाहने और नहीं चाहने का प्रश्न नहीं है। यह सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उसमें शासन की स्थिति ही नहीं है।

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