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फचर्ाी शंकराचार्य पर काशी में घमासान

मालेगांव धमाके में पकड़े गए अमृतानंद को काशी में शंकराचार्य की कथित उपाधि दिए जाने पर घमासान मचा है। काशी विद्वत परिषद के कई पदाधिकारियों ने नगर निगम प्रेक्षागृह में आयोजित उस कार्यक्रम से पल्ला झाड़ लिया है जिसमें अमृतानंद को शंकराचार्य की उपाधि दी गयी थी। परिषद के महामंत्री पं.बटुक नाथ शास्त्री का तो यहां तक कहना है कि आयोजन के निमित्त राजेन्द्र पचौरी नामक व्यक्ति ने उनसे बात की थी और धन का प्रलोभन भी दिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप साबित करना कठिन है,लेकिन मैंने आयोजन में शामिल होने से इनकार कर दिया था। उधर श्री पचौरी ने फोन पर हुई वार्ता में दो टूक कहा कि इस आयोजन से पहले वह अमृतानंद को नहीं जानते थे। यह जरूर है कि कुछ लोगों के कहने पर उन्होंने आयोजन का संचालन किया। जहां तक धन के प्रलोभन की बात है वह पूरी तरह तथ्यहीन है। पं.बटुक नाथ शास्त्री ने कहा कि शंकराचार्य जसी उपाधि काशी विद्वत परिषद की ओर से नहीं दी जाती। दूसर उन्हें इसके पूर्व ही किसी ने फोन पर जानकारी दी थी कि सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी अमृतानंद उर्फ दयानंद पांडेय का कानपुर में पारिवारिक विवाद में मुकदमा भी चल रहा है। जानकारी के अनुसार काशी विद्वत परिषद द्वारा इनकार किए जाने पर वाराणसेय विद्वत परिषद का गठन कर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मामले में काशी विद्वत परिषद का नाम आने से खासे उद्वेलित महामंत्री पं.बटुक नाथ शास्त्री ने तो यहां तक कहा कि श्री पचौरी द्वारा उनसे संपर्क किए जाने के दो दिनों बाद उन्होंने अमात्यों की बैठक बुलाई जिसमें यह तय किया गया कि शंकराचार्य पद पर वही आसीन हो सकता है जो उस योग्य हो। साथ ही परिषद को शंकराचार्य बनाने का कोई अधिकार भी नहीं है। कुल मिलाकर इस प्रकार का आयोजन, शंकराचार्य घोषित करने वाले और होने वाले सभी फ्राड हैं।

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  • Web Title: फचर्ाी शंकराचार्य पर काशी में घमासान