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चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर रहेगी 6.9 प्रतिशत

चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर रहेगी 6.9 प्रतिशत

भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में (जनवरी-मार्च 2012) अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन तीसरी तिमाही से बेहतर रहेगा पर 2011-12 में आर्थिक वृद्धि दर अनुमानित 6.9 प्रतिशत के इर्द-गिर्द रहेगी।
  
केंद्रीय बैंक ने आज मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने आर्थिक वृद्धि दर 2011-12 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो रिजर्व बैंक के अनुमानों के अनुरूप ही है। रिजर्व बैंक ने पिछली तिमाही समीक्षा में वृद्धि दर 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। 
   
रिजर्व बैंक ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में नरमी आ रही है लेकिन चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में आर्थिक वृद्धि दर बेहतर रहने की उम्मीद है।
   
समीक्षा में कहा गया है कि रिजर्व बैंक औद्योगिक गतिविधियों के आकलन के लिए केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के अलावा कुछ अन्य संकेतों का भी प्रयोग करता है। इसी सदर्भ में उसने विनिर्माण कंपनियों के क्रय का संकेत देने वाले पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इनडेक्स) का जिक्र करते हुए कहा है कि इसमें फरवरी महीने के दौरान वृद्धि देखी गयी।
  
समीक्षा में कहा गया है कि सालाना आधार पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 2011-12 की तीसरी तिमाही में 6.1 प्रतिशत रही जो दूसरी तिमाही के 6.9 प्रतिशत से कम है। यह औद्योगिक गतिविधियों में नरमी को प्रतिबिंबित करता है।
  
रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि में नरमी निवेश गतिविधियों तथा बाहय मांग में कमी का नतीजा है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आधारित औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 2011-12 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 4.0 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी अवधि में 8.3 प्रतिशत थी।
   
रिजर्व बैंक के अनुसार पूंजीगत वस्तुओं तथा मध्यवर्ती वस्तुओं का उत्पादन करने वाले क्षेत्रों की वृद्धि नकारात्मक रही। हालांकि आधारभूत वस्तुओं तथा उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
   
रिजर्व बैंक आईआईपी आंकड़ों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए औद्योगिक गतिविधियों का पता लगाने के लिये कई अन्य सूचकांकों का उपयोग करता है जिसमें विनिर्माण पीएमआई भी शामिल है। पीएमआई विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति को दर्शाता है।
 
वैश्विक आर्थिक स्थिति के बारे में रिजर्व बैंक ने कहा कि तीसरी तिमाही की 24 जनवरी की समीक्षा के बाद वैश्विक वहत आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिये हाल के वहत आर्थिक आंकड़ें कुछ सकारात्मक संकेत देते हैं। श्रम बाजार में भी सुधार हुए हैं।
  
बहरहाल शीर्ष बैंक के अनुसार अमेरिका में जहां एक तरफ सुधार हो रहे हैं वहीं यूरो क्षेत्र में आर्थिक गतिविंधयों में नरमी आयी है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि हालांकि यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने नकदी डालकर वित्तीय बाजार पर दबाव को कम करने की कोशिश की है लेकिन सरकारी रिण संकट का विश्वसनीय एवं टिकाउ समाधान अभी आना बाकी है।   
  
रिजर्व बैंक ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में नरमी, यूरो में क्षेत्र में अनिश्चितता तथा कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि संभावना पर असर पड़ेगा।
  
केंद्रीय बैंक ने कहा कि उभरते तथा विकासशील देशों में वृद्धि में नरमी के संकेत हैं। इसके कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2012 तथा 2013 में पूर्व के अनुमान से कम रहने की आशंका है।     

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