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विधानपरिषद के सदस्य बन सकते हैं अखिलेश यादव

विधानपरिषद के सदस्य बन सकते हैं अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में गुरुवार को शपथ लेने वाले अखिलेश यादव विधानसभा का चुनाव लड़ने के बजाय विधानपरिषद का सदस्य बन सकते हैं।

बजट सत्र में भाग लेने के बाद कल लखनऊ वापस आने पर अखिलेश यादव ने संकेत दिये कि वह विधानसभा का चुनाव लड़ने के बजाय विधानपरिषद का सदस्य बन सकते हैं।

अखिलेश यादव अभी कन्नौज से लोकसभा सदस्य हैं और वर्तमान में वह विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के तहत मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश को छह महीने के अंदर विधानसभा अथवा विधानपरिषद का सदस्य बनना आवश्यक है।    

विधान परिषद का रास्ता अपना कर अखिलेश यादव मायावती के पदचिन्हों का अनुसरण करेंगे। वर्ष 2007 में चुनाव जीतने के बाद मायावती राज्यसभा छोड़कर विधान परिषद की सदस्य बन गयी थीं। 

अखिलेश यादव ने कहा कि हालांकि पार्टी के कई विधायकों ने उनके लिए अपनी सीट छोड़ने की पेशकश की थी मगर उनकी (अखिलेश की) नजर में यह उचित नही है कि, जनता ने जिन्हें मत देकर अपना जनप्रतिनिधि चुना है उस जीते हुए विधायक को हटा कर वहां का प्रतिनिधित्व मैं करने लगूं।

बसपा सुप्रीमों के राज्यसभा में सपा को घेरने संबंधी बयान के बारे में, उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अच्छा होता कि मायावती राज्यसभा का सदस्य बनने की बजाय विधानपरिषद का सदस्य रह कर उनकी सरकार को घेरतीं।

कानून व्ययस्था के सवाल पर यादव ने कहा कि इस समय कार्यवाहक मुख्यमंत्री मायावती हैं इसलिए कानून व्यवस्था का प्रश्न उनसे ही किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि कल प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री के रुप में अखिलेश यादव को शपथ दिलाई जायेगी। वे प्रदेश के 33वें मुख्यमंत्री होंगे।

अपने शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल को बुलाये जाने के प्रश्न पर यादव ने कहा कि ऐसे समारोहों में सभी दलों के प्रमुख नेताओ को बुलाने की परम्परा रही है, इसलिए सोनिया गांधी सहित अनेक बड़े नेताओं को शपथग्रहण समारोह में बुलाया गया है।

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