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सीएम की कुर्सी पर घमासान, हरीश रावत का इस्तीफा

सीएम की कुर्सी पर घमासान, हरीश रावत का इस्तीफा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नामित नहीं किए जाने के बाद मंगलवार को केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों ने बताया कि संसदीय कार्य राज्य मंत्री रावत ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
   
कांग्रेस में रावत के करीबी एक नेता ने बताया हम सिर्फ इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि इस्तीफा भेज दिया गया है। रावत ने यह कदम उस वक्त उठाया है जब कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी की अनदेखी कर लोकसभा सांसद विजय बहुगुणा को इस पद के लिए नामित कर दिया।
   
ऐसा दूसरी बार हुआ है जब मुख्यमंत्री पद के लिये रावत के दावे की अनदेखी की गई है। दरअसल, करीब 10 साल पहले पार्टी नेतृत्व ने नारायण दत्त तिवारी को आखिरी वक्त पर मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया था। रावत से जब यह सवाल किया गया कि क्या वह इस्तीफा देने की सोच रहे हैं, उन्होंने कहा कि मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।
   
हरिद्वार से लोकसभा सदस्य रावत मुख्यमंत्री पद के अहम दावेदार थे। रावत के इस्तीफे की खबरों के बीच नामित मुख्यमंत्री बहुगुणा ने कहा कि पार्टी किसी भी संकट का सामना करने के लिए तैयार है। बहुगुणा ने कहा यह दबाव बनाने का तरीका है। हम इससे निपट लेंगे।
   
रावत के समर्थक बहुगुणा के शपथ-ग्रहण समारोह का बहिष्कार करेंगे। नरेंद्र नगर से विधायक और बहुगुणा के करीबी सुबोध उनियाल ने कहा आज सिर्फ बहुगुणा शपथ लेंगे।          
   
बहुगुणा को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री नामित किए जाने के तुरंत बाद कांग्रेस की प्रदेश इकाई में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। रावत के समर्थकों ने पार्टी आलाकमान के इस निर्णय का विरोध किया है।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत उत्तराखंड के नए सीएम के रूप में विजय बहुगुणा का नाम घोषित होने पर नाराज हैं। उनके घर में समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ है। नाराजगी के चलते आज वह संसद भी नहीं पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि इन हालातों में काम करना बेहद मुश्किल है।

उनके समर्थकों ने कहा कि मंगलवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में उनके समर्थक विधायक शामिल नहीं होंगे। सूत्रों के मुताबिक उनके साथ 16 विधायक हैं। कुछ समर्थकों ने यहां तक दावा किया कि वह राज्य में नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं।

इस बीच, कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने दिल्ली में कहा कि निराश होना तो लाजमी है लेकिन सभी को उन चुनौतियों का सामना करने की दिशा में काम करना चाहिए जिनसे पर्वतीय राज्य में संगठन जूझ रहा है।
   
उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी सक्षम है, नेतृत्व सक्षम है। बहुमत के आधार पर एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना था और ऐसा किया गया है। समर्थकों में थोड़ी निराशा है। लेकिन चुनौतियों और इस तथ्य को ध्यान में रखकर कि यह एक काफी कठिन प्रतियोगिता थी, नेता और समर्थक पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।
   
जब इन अटकलों के बारे में पूछा गया कि रावत इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री सोनी ने कहा कि ये महज अटकलें हैं। उन्होंने कहा समर्थक इस बात से नाराज हैं कि उनके नेता को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। यह निराशा समझी जा सकती है। लेकिन चुनौतियों को ध्यान में रखकर, मैं इस बात के प्रति आश्वस्त हूं कि नेता अपने समर्थकों को पार्टी का अनुशासन तोड़ने की इजाजत नहीं देंगे।
   
किसी तीसरे मोर्चे की बात को तवज्जो न देते हुए सोनी ने कहा कि तीसरे मोर्चे की बात कर रहे लोगों को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे चाहते क्या हैं। उन्होंने कहा मुझे बहुत कुछ सुनने में आता है लेकिन हम हर चीज पर टिप्पणी नहीं कर सकते।

अल्मोड़ा से कांग्रेस सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि वह रावत के समर्थन में हैं। केंद्रीय मंत्री से मिलने के बाद टम्टा ने कहा कि इस मामले में रावत के साथ अन्याय हुआ, जिससे राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं को काफी निराशा हुई है।
   
बहरहाल, उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पार्टी में किसी तरह की संभावित फूट से यह कहते हुए इंकार किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उनकी नेता हैं। टम्टा ने कहा कोई भी पार्टी नहीं तोड़ेगा।
   
उन्होंने कहा हम तो सिर्फ इतना कह रहे हैं कि इस मामले में रावत के साथ जो भी हुआ वह अन्याय है। उत्तराखंड में वह एकमात्र ऐसे नेता हैं जो सभी को स्वीकार्य हैं और वह राज्य में पार्टी का चेहरा हैं।
   
विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने के फैसले की बाबत उन्होंने इससे पहले कहा कि जब विधायकों ने शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात की तो उनसे कहा गया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए किसी विधायक को चुनना है क्योंकि किसी सांसद को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता।
   
इस बीच, रावत की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे कुछ विधायक केंद्रीय मंत्री के आवास के बाहर एकजुट हुए और बहुगुणा को नया मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की।

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