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चुनौतियों का डटकर सामना करेगी सरकार: पाटिल

चुनौतियों का डटकर सामना करेगी सरकार: पाटिल

सरकार ने सोमवार को आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा के साथ साथ आजीविका एवं आर्थिक सुरक्षा सहित पांच बडी चुनौतियों से निपटने की दिशा में काम करने का संकल्प व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि भारत आठ से नौ प्रतिशत की उंची विकास दर की स्थिति में वापस आ जाएगा।
   
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन पारंपरिक रूप से दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश के समक्ष पांच प्रमुख चुनौतियां हैं, जिन पर मेरी सरकार काम करेगी। आबादी के एक बडे हिस्से को आजीविका सुरक्षा प्रदान करने के लिए सतत प्रयास करना तथा देश से गरीबी, भूख और निरक्षरता समाप्त करने के लिए कार्यरत रहना।
   
उन्होंने दूसरी बडी चुनौती की चर्चा करते हुए कहा कि त्वरित एवं व्यापक विकास तथा जनता के लिए आजीविका आधारित कार्यों का सृजन करते हुए आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करना। प्रतिभा पाटिल ने तीन अन्य चुनौतियों में त्वरित विकास के लिए उर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरण सुरक्षा को जोखिम में डाले बिना विकास लक्ष्य प्राप्त करना तथा न्यायसंगत, बहुलवाद, पंथनिरपेक्ष तथा समावेशी लोकतंत्र के दायरे में देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करना गिनाया।
   
संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में संभवत: अपने अंतिम अभिभाषण में वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति पाटिल ने कहा कि यह वर्ष विश्व अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलों भरा रहा है। आर्थिक अनिश्चितताओं का पूरे विश्व पर प्रतिकूल असर पडा है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में राजनीतिक अनिश्चितता व अस्थिरता बढी है और जिस परिवेश में हम कार्य कर रहे हैं, वह पिछले एक साल में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
   
उन्होंने कहा कि 2010-11 में अर्थव्यवस्था 8.4 प्रतिशत की आकर्षक दर से बढी लेकिन इस वर्ष यह घटकर लगभग सात फीसदी हो गई। विश्व की मौजूदा प्रवृत्तियों को देखते हुए यह विकास दर अच्छी है। भारतीय अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक मूलतत्व स्वस्थ बने हुए हैं।

भारत की विकास संभावनाएं उच्च घरेलू बचत एवं निवेश दर, अनुकूल जनसांख्यिकी और स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसे कारकों से प्रेरित हैं। मेरी सरकार को विश्वास है कि वह जल्द ही देश के आर्थिक विकास को पुन: आठ से नौ प्रतिशत की उच्च दर पर वापस ले आएगी।
   
प्रतिभा पाटिल ने कहा कि उनकी सरकार ईमानदार एवं अधिक कारगर शासन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। संसद में लोकहित प्रकटन और प्रकटन करने वालों को संरक्षण विधेयक और अंतरराष्ट्रीय लोक संगठनों के पदाधिकारियों की रिश्वत संबंधी भ्रष्टाचार निवारण विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व विधेयक पेश किये गये हैं।
   
प्रतिभा ने कहा कि न्यायिक मानक एवं जवाबदेही विधेयक भी पेश किया गया। भारत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ संधि का अनुमोदन किया है। ये सभी भ्रष्टाचार को रोकने में रूपांतरकारी परिवर्तन कराने और शासनतंत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढाने में सक्षम होंगे।
   
पाकिस्तान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मामलों का हल बातचीत के जरिए करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि पाकिस्तान के लिए आवश्यक है कि वह अपनी जमीन पर आतंकवादी गुटों और उनसे संबंधित ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे, अब तक हुई प्रगति को हम आगे बढाना चाहेंगे।
   
काले धन की चर्चा करते हुए पाटिल ने कहा कि सरकार काले धन की समस्या से निपटने के लिए विविध मोर्चों पर कार्रवाई शुरू कर चुकी है। इस क्रम में बेनामी संव्यवहार कानून बन चुका है और धन शोधन निवारण कानून में संशोधन किया गया है। देश के भीतर और बाहर मौजूद काले धन का आकलन करने के लिए कई स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा अध्ययन कराया जा रहा है।
   
राष्ट्रपति ने कहा कि हम देश में अवैध निधियों के सजन और उनके देश से बाहर जाने को रोकने के लिए कई कदम उठा रहे हैं तथा विदेश से काले धन संबंधी व्यापक सूचना प्राप्त करने के लिए चैनल स्थापित कर रहे हैं।
   
अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की महाशक्तियों के साथ हमारी भागीदारी बढ रही है। अमेरिका हमारा अहम सामरिक साझेदार है, जिसके साथ हमारे बहुआयामी संबंध हैं और जो हमारे राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं। यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों के साथ भारत के संबंध साझा मूल्यों और बढते वाणिज्यिक, आर्थिक एवं जनता के परस्पर संबंधों पर आधारित हैं।

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