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राष्ट्रमंडल स्ट्रीट-लाइटिंग मामले में आरोप तय

राष्ट्रमंडल स्ट्रीट-लाइटिंग मामले में आरोप तय

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के दौरान हुए स्ट्रीट लाइट घोटाले में उनकी कथित भूमिका के लिये दिल्ली नगर निगम के चार अधिकारियों समेत सात लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।
   
विशेष सीबीआई न्यायाधीश प्रदीप चड्ढा ने दिल्ली नगर निगम के अधीक्षण अभियंता डी के सुगान, कार्यकारी अभियंता ओ पी महला, लेखाकार राजू वी और इस नगर निकाय के निविदा क्लर्क गुरचरण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए।
   
अदालत ने निजी कंपनी स्वेस्का पावरटेक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड, उसके प्रबंध निदेशक टी पी सिंह और निदेशक जे पी सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए। इन लोगों पर वर्ष 2010 में स्ट्रीट लाइटिंग का ठेका अवैध तरीके से पाने का आरोप है।
   
अदालत ने आरोपियों द्वारा दोष स्वीकार नहीं करने पर उनके खिलाफ आरोप तय किए। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय कर दिये गये हैं। उन्होंने दोष स्वीकार नहीं किया था और कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए।
   
अदालत ने मामले में अभियोजन पक्ष के सबूतों को रिकार्ड करने के लिये तीन अप्रैल की तिथि निर्धारित की। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप तय किए हैं।

अपने आरोप पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि दिल्ली में वर्ष 2010 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों को देखते हुए एमसीडी ने स्ट्रीट लाइटिंग प्रणाली को उन्नत करने का फैसला किया था।
    
आरोप पत्र के मुताबिक इस नगर निकाय ने वर्ष 2008 में इस कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं और स्वेस्का पावरटेक समेत पांच कंपनियों ने इसके लिये आवेदन दिया था। लेकिन एमसीडी ने केवल तीन कंपनियों को स्वीकृति दी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कंपनी ने निविदा के लिये फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया।

 

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