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101 जाट नेता रिहा, आंदोलन पर फैसला बाकी

हरियाणा में पिछले 10 दिनों से चल रहे आरक्षण आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार 100 से अधिक जाट नेताओं को रविवार शाम रिहा कर दिया गया, लेकिन आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया जाना अभी बाकी है।

सूत्रों ने बताया कि रिहा किए गए 101 जाट नेता आंदोलन के मुख्य स्थल मय्यर गांव पहुंचे जहां वे अगली रणनीति तय करने के लिए बैठक कर रहे हैं। रविवार को जाट नेताओं की रिहाई के बाद भी आंदोलन खत्म न किए जाने से भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार को शर्मिदगी झोलनी पड़ी, क्योंकि शनिवार शाम नेताओं की रिहाई की मांग मान लिए जाने के बाद राज्य सरकार ने आंदोलन खत्म होने की घोषणा कर दी थी। इससे पहले सरकार ने जाट नेताओं की रिहाई की मांग अस्वीकार कर दी थी।

आंदोलनकारी जाट नेताओं ने शर्त रखी थी कि जब तब उनके गिरफ्तार नेताओं को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे प्रशासन और प्रदेश सरकार से किसी तरह की बातचीत नहीं करेंगे।

हरियाणा के हिसार और उससे सटे भिवानी, जींद और रोहतक जिले में जाटों के विरोध प्रदर्शन के चलते करीब 10 दिनों से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा है। इसके साथ ही एनसीआर में दूध और सब्जी उत्पादों की किल्लत हो गई है।

हरियाणा सरकार द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन करने वाले करीब 100 जाट नेताओं को रिहा करने की मांग ठुकराए जाने के बाद प्रदेश में जाट आंदोलनकारियों ने शनिवार को सड़क और रेल यातायात एक फिर ठप्प कर दिया था जो रविवार को भी जारी रहा।

ज्ञात हो कि गत बुधवार को हुई हिंसा में एक युवक की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने हिसार को दिल्ली, जींद, भिवानी और चण्डीगढ़ से जोड़ने वाले राजमार्गो को जाम कर दिया है। इसके अलावा हिसार-दिल्ली रेलपटरी अवरुद्ध कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि जाट समुदाय पिछले कुछ दिनों से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। इस आंदोलन के कारण राज्य में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मंगलवार को पुलिस की गोलीबारी में एक युवक की मौत से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को दिल्ली जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलपटरियों को जाम कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर एक पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया था और हिसार कैंट के नजदीक  एक बैंक की शाखा में भी तोड़फोड़ की थी।

जाट नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री हुड्डा पहले किए अपने वादे से मुकर रहे हैं और टाल-मटोल की नीति अपना रहे हैं तथा आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

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