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संसद सत्र सोमवार से, आसान नहीं केंद्र सरकार की राह

संसद सत्र सोमवार से, आसान नहीं केंद्र सरकार की राह

सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में एक ओर सरकार को विपक्षी दलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है तो दूसरी ओर अपने ही गठबंधन के सहयोगियों को एकजुट रखने की चुनौती भी उसके समक्ष होगी, खासकर ऐसे में जबकि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की एक अहम भागीदार तृणमूल कांग्रेस के तेवर लगातार बगावती बने हुए हैं।

संसद का बजट सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जो दो चरणों में 22 मई तक चलेगा। पहले चरण में 12 मार्च से 30 मार्च के तहत संसद की कार्यवाही चलेगी, जबकि दूसरे चरण में इसकी कार्यवाही 24 अप्रैल से 22 मई तक चलेगी।

सत्र की शुरुआत सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। इसके बाद 14 मार्च को रेल बजट पेश होगा, 15 मार्च को आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट और 16 मार्च को आम बजट पेश होगा। इस दौरान विधानसभा चुनाव नतीजों से बैकफुट पर आई केंद्र सरकार की राह असान नहीं मालूम पड़ती।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल के इस तेवर की वजह से केंद्र सरकार को पहले भी कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। चाहे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकपाल विधेयक की बात हो या खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश को मंजूरी की या फिर महंगाई की, तृणमूल ने हमेशा विरोध में आवाज उठाई। तृणमूल के इस रवैये के कारण कांग्रेस से उसके सम्बंध तनावूपर्ण बने हुए हैं। पार्टी ने संसद के मौजूदा सत्र में भी वित्तीय मुद्दों पर अपनी रणनीति को लेकर बैठक की है।

इधर, कांग्रेसी व गैर-भाजपाई तीसरे मोर्चे के गठन की अटकलें भी लगाई जाने लगी है। पंजाब में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे प्रकाश सिंह बादल द्वारा 14 मार्च को और समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा 15 मार्च को अखिलेश यादव के शपथ-ग्रहण में ममता को आमंत्रित किए जाने से इस सम्बंध में अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है।

ममता ने हालांकि अभी आमंत्रण स्वीकार नहीं किया है, लेकिन उनके तेवरों को देखकर संकेत केंद्र सरकार के पक्ष में नहीं नजर आ रहे, जबकि विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद तृणमूल पर उसकी निर्भरता बढ़ गई है।

सत्र के दौरान विपक्षी दल भी सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बैठक रविवार को हो रही है, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक सोमवार को होगी। विपक्षी दल कालेधन व महंगाई के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त सरकार को यादवों की तिकड़ी से भी निपटना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश चुनाव में सपा की शानदार जीत के साथ मुलायम सिंह यादव अधिक ताकतवर बनकर उभरे हैं। साथ ही उन्होंने केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने के संकेत भी दे दिए हैं। सरकार को घेरने में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव का भी साथ मिल सकता है।

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