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राष्ट्रपति सलाह पर महाधिवक्ता की राय चाहती है सरकार

राष्ट्रपति सलाह पर महाधिवक्ता की राय चाहती है सरकार

प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी से सम्बंधित 2जी लाइसेंस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार राष्ट्रपति सलाह के प्रस्ताव पर फैसला लेगी। लेकिन इससे पहले सरकार महाधिवक्ता की राय पाना चाहती है।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को अपनी बैठक में मामले पर फैसला आगे के लिए टाल दिया। मामले पर अंतिम निर्णय लेने से पहले मंत्रिमंडल ने महाधिवक्ता रोहिंटन नरीमन की राय मांगी है।

ज्ञात हो कि संविधान के अनुच्छेद-143 के तहत राष्ट्रपति जनहित के मामलों को सुप्रीम कोर्ट भेज सकता है। इस मामले में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील सुप्रीम कोर्ट से यह पूछ सकती हैं कि क्या उसका फैसला अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर भी बाध्यकारी है। न्यायालय ने अपने फैसले में सरकार को प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन केवल नीलामी के जरिए ही करने का निर्देश दिया है।

सरकार 2जी लाइसेंस के आवंटन में ‘पहले आओ पहले पाओ’ की अपनी नीति को गलत ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहले ही पुनरीक्षण याचिका दायर कर चुकी है। उल्लेखनीय है कि न्यायालय 2जी स्पेक्ट्रम मामले में अपने दो फरवरी के आदेश में दूरसंचार कम्पनियों के 122 लाइसेंस रद्द कर चुका है।

चर्चा से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल की अगले हफ्ते की शुरूआत में एकबार फिर बैठक होगी, जिसमें इस तरह का परामर्श मांगने में उनसे कानूनी पहलुओं के बारे में प्रस्तुतीकरण देने को कहा जाएगा। सरकार पहले ही समीक्षा याचिका दायर कर चुकी है जिसमें शीर्ष अदालत के दो फरवरी के फैसले के कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

एक सूत्र ने बताया कि हमने 122 लाइसेंसों को रद्द करने को चुनौती नहीं दी है। कानून के तहत आप परामर्श के जरिए फैसले को चुनौती नहीं दे सकते। सूत्र ने बताया कि परामर्श का मतलब फैसले को पलटना नहीं है क्योंकि परामर्श देने वाली अदालत अपीलीय अदालत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट अंतिम अदालत है। इसलिए, परामर्श देने वाली अदालत अपीलीय अदालत नहीं है लेकिन फैसले से उपजने वाले कुछ मुद्दे, जो जन मुद्दों की प्रकृति के हैं, उसपर हम परामर्श मांग सकते हैं। दूरसंचार विभाग का मानना है कि फैसले का कई अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव है।

सूत्र ने बताया, हम फैसले को चुनौती नहीं दे रहे हैं लेकिन हम उन मुद्दों पर परामर्श मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने मंत्रिमंडल को फैसले के प्रयोग के बारे में समझाया। सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल ने हालांकि राष्ट्रपति के शीर्ष अदालत से परामर्श मांगने पर फैसला टाल दिया और सॉलीसीटर जनरल की राय जानने के बाद अंतिम फैसला किया जाएगा। कानून के अनुसार शीर्ष अदालत राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए सभी परामर्श पर जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है।

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