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उत्तराखंड में आजाद बने कांग्रेस के सारथी

उत्तराखंड में आजाद बने कांग्रेस के सारथी

केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर यहां आए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद उत्तराखंड में पार्टी के नवनिर्वाचित 32 विधायकों के साथ बातचीत कर रहे हैं। राज्य में गुटबाजी के चलते कांग्रेस विधायक दल के नेता के चयन में मुश्किल आ रही है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आजाद और पार्टी के महासचिव चौधरी बीरेंद्र सिंह बीजापुर अतिथि गृह में विधायकों के साथ बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद वे पार्टी आलाकमान को विधायक दल के नए नेता के बारे में एक रिपोर्ट पेश करेंगे।

सरकार बनाने में अहम भूमिका निर्दलीय विधायकों की होगी जिन्होंने कई शर्तें रख दी हैं। इसकी वजह से विधायक दल का नेता चुनने में दिक्कत पेश आ रही है।

उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 32 विधायक हैं। यह संख्या सरकार बनाने के लिए अपेक्षित बहुमत से चार कम है। तीन निर्दलीय विधायक और यूकेडी (पी) के एक विधायक सरकार बनाने के लिए आवश्यक 36 विधायकों की संख्या पूरी करने में मदद कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि पार्टी में व्याप्त गुटबाजी के चलते कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने में विलंब हो रहा है।

कांग्रेस के एक नेता ने बताया गुटबाजी इतनी अधिक है कि कांग्रेस आलाकमान ने विशेष पर्यवेक्षक के तौर पर आजाद को नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों की राय जानने के लिए भेजा है। उन्होंने कहा हम सभी विधायकों की राय जानेंगे और जल्द ही कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन कर लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार विधायक तीन से चार गुट में बंटे प्रतीत होते हैं। बताया जाता है कि ये गुट केंद्रीय मंत्री हरीश रावत, केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज, वरिष्ठ नेता विजय बहुगुणा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य के हैं।

कर्णप्रयाग सीट से कांग्रेस के विधायक अनुसूइया प्रसाद माइखुरी ने कहा मैं चाहता हूं कि सतपाल महाराज को मुख्यमंत्री बनाया जाए। इसके अलावा पूर्ववर्ती सदन में विपक्ष के नेता हरक सिंह रावत और वरिष्ठ नेता इंदिरा ह्दयेश को भी कांग्रेस विधायक दल के नए नेता के तौर पर पेश किया जा रहा है।

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