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और सस्ता हो सकता है कर्चा लेना

आसमान छूती महंगाई और ऊंची ब्याज दरों के बीच भले ही आप अरसे से अपनी घर-गृहस्थी से जुड़े छोटे-छोटे सपनों को स्थगित करने के लिए विवश होते रहे हों लेकिन अब जल्द ही उन्हें पूरा करने का वक्त आ सकता है। संकेत है कि सरकार के सहयोग से जल्द ही रिार्व बैंक आने वाले दिनों में सस्ते बैकिंग र्का का रास्ता साफ कर सकता है। इस सिलसिले में दो से तीन फीसदी के बीच ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही है। इसके जरिए न सिर्फ ऑटो, रीयल एस्टेट और उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्रों को लाभ होगा बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और ढांचागत क्षेत्र को बढ़ावा मिलने से औद्योगिक विकास का लडख़ड़ाता पहिया फिर से तेजी से घूमना शुरू करगा। यहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) और उद्योग चैंबर सीआईआई की ओर से आयोजित 24 वीं इंडिया इकोनॉमिक समिट के दौरान आईसीआईसीआई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के.वी.कामथ ने इस बात के पुख्ता संकेत दिये हैं कि आने वाले दिनों में घरलू ब्याज दरं दो से तीन फीसदी तक कम हो सकती हैं। यही नहीं, महंगाई दर भी आरबीआई के लक्ष्यों के अनुरूप चालू वित्त वर्ष के अंत तक पांच फीसदी या फिर इससे भी नीचे आने की उम्मीद है। कामथ ने कहा कि मौजूदा संकट से बचने के दो तरीके हैं। पहला, ब्याज दरों में कमी के जरिए सस्ते र्का में बढ़ोत्तरी। मुझे विश्वास है कि सरकार इस दिशा में जरूर काम करगी और बैंक ज्यादा र्का देना शुरू करंगे। दूसरा, ऐसे फैसलों का कार्यन्वयन जिनके जरिए महंगाई दर में कमी हो। उम्मीद है कि आने वाले तीन से चार महीनों में महंगाई दर चार से पांच फीसदी के बीच आ जाएगी। ध्यान रहे कि मार्च अंत खुद आरबीआई ने महंगाई दर के पांच फीसदी पर आने की उम्मीद जताई है। मंहगाई दर कमी का व्यावहारिक मतलब ज्यादा और सस्ते र्का का रास्ता तैयार होने से होगा। पिछले दिनों आरबीआई गवर्नर डॉ.डी. सुब्बाराव के कथन से सुर में सुर मिलाते हुये कामथ ने कहा कि अमेरिकी संकट इसलिए आया कि बेरोकटोक र्का ऐसे निकायों को दिया गया जो अपेक्षित नियमन दायर से बाहर थे। दूसरी ओर बैकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों ने आरबीआई की ओर से रपो दर में 0.5 फीसदी की कमी की उम्मीद जताई है। वहीं देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन ओ.पी.भट्ट ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ब्याज दरों में और कमी की जरूरत है।

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