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RBI ने की CRR में 0.75 फीसदी की कटौती

RBI ने की CRR में 0.75 फीसदी की कटौती

रिजर्व बैंक ने बैंकों के पास नकदी की तंगी दूर करने के लिये शुक्रवार को उन पर लागू नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में एक झटके में 0.75 प्रतिशत कटौती कर दी। इससे बैंकों का रिजर्व बैंक के नियंत्रण में पड़ा  48,000 करोड़ रुपया ऋण देने के लिए मुक्त हो जाएगा।

रिजर्व बैंक ने आज जारी वक्तव्य में कहा सीआरआर 5.5 प्रतिशत से घटाकर 4.75 प्रतिशत करने से बैंकिंग तंत्र में करीब 48,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी। नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर बैंकों की जमा राशि का वह हिस्सा होता है जिसे बैंकों को रिजर्व बैंक के पास सुरक्षित रखना होता है।

रिजर्व बैंक ने कहा है कि सीआरआर कटौती कल से प्रभावी हो जायेगी। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि इस कटौती का उद्देश्य बैंकों में नकदी की तंगी को दूर करना है। माना जा रहा है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में अग्रिम कर के लिये बैंकों से निकासी तेज होगी और ऐसे में नकदी की कमी बढ़ सकती है।

अग्रिम कर भुगतान की आखिरी तिथि 15 मार्च है और यह करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक रहने की उम्मीद है। यानी बैंकों से इतनी राशि निकलकर सरकार के खाते में जाएगी, इससे नकदी पर दबाव बढ़ सकता है।

रिजर्व बैंक ने इससे पहले 24 जनवरी 2012 को घोषित मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में सीआरआर में 0.5 प्रतिशत कटौती की थी। इस कटौती से भी बैंकों में 32,000 करोड़ रुपये की नकदी बढ़ाने का उपाय किया गया था।

रिजर्व बैंक नकदी बढ़ाने के लिये जनवरी से अब तक बैंकिंग तंत्र में 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी बहाल करने के उपाय कर चुका है। केन्द्रीय बैंक ने सीआरआर में जनवरी में आधा प्रतिशत और मार्च में 0.75 प्रतिशत कटौती कर पिछले दो महीने में सवा प्रतिशत कटौती कर दी है। इसके बाद सीआरआर दर जनवरी में जहां छह प्रतिशत पर थी वह घटकर अब 4.75 प्रतिशत रह गई।

रिजर्व बैंक ने सीआरआर कटौती के साथ-साथ खुले बाजार में भी अपना संचालन कार्य जारी रखा और इसके जरिये इस वित्त वर्ष में अब तक 1.24 लाख करोड़ रुपये की नकदी बाजार में पहुंचाई है। इसमें से भी 52,800 करोड़ रुपये की नकदी जनवरी में तीसरी तिमाही की समीक्षा जारी होने के बाद डाली गई।

बैंकों के पास नकदी की तंगी के कारण बैंकों को काफी परेशानी हुई और पिछले कुछ दिनों में केन्द्रीय बैंक से औसतन एक लाख करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटानी पड़ी। हालात यह हो गये कि रिजर्व बैंक की नकदी समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों की नेट उधारी जनवरी में 1.29 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर फरवरी में 1.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिजर्व बैंक की विज्ञप्ति के अनुसार एक मार्च 2012 को इस सुविधा के तहत ली जानी वाली उधारी 1.91 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, हालांकि, इसके बाद यह कम होकर सात मार्च को 1.27 लाख करोड़ रुपये रह गई। इस स्थिति को देखते हुये यह माना गया कि बाजार में नकदी की तंगी रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से उपर बनी हुई है।

रिजर्व बैंक ने बाजार में नकदी की इस स्थिति पर गौर करते हुये सीआरआर में कटौती कर नकदी बढ़ाने का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश की है। इससे अर्थव्यवस्था में उत्पादक क्षेत्रों के लिये कर्ज की उपलब्धता सामान्य हो सकेगी। रिजर्व बैंक ने मध्यतिमाही समीक्षा से एक सप्ताह पहले ही सीआरआर कटौती की घोषणा कर दी।

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