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पहेली बनी इन्दिरा आवास घोटाले की चााँच

मुलायम सरकार में इन्दिरा आवासों के नाम पर हुए लाखों के घोटाले कीोाँच खुद पहेली बन गई है। ग्राम विकास आयुक्त दो साल से चल रही इसोाँच की रिपोर्ट नहीं दे पाए। कई बड़े अधिकारी इस घपले की चपेट में आ रहे हैं। अब सरकार ने अचानक इस घोटाले केोाँच अधिकारी को बदल दिया है। दिलचस्प है किोाँच का काम ऐसे अफसर को दिया गया हैोो अगले महीने रिटायर हो रहे हैं।ड्ढr लखनऊ में लगभग पाँच वर्ष पूर्व इन्दिरा आवासों की मरम्मत और उससे जुड़े दूसर कामों के नाम पर लाखों रुपए का घोटाला हुआ। घोटाले की शिकायत पर तत्कालीन सरकार ने प्राथमिक जाँच सयुंक्त ग्राम्य विकास आयुक्त एस.एन त्रिपाठी से कराई थी। प्राथमिक जाँच में न केवल घोटाले की शिकायत सच पाई गई बल्कि मामले में तत्कालीन परियोजना निदेशक जगदीश सिंह और अन्य अधिकारियों सहित एक एनजीओ को भी लिप्त पाया गया था। इस मामले में और कई उच्चाधिकारी फँस रहे थे।ड्ढr शासन ने घपले की विस्तृत जाँच के लिए ग्राम्य विकास आयुक्त को नामित किया। पर दो वर्ष बीतने के बावजूद आयुक्त जाँच पूरी नहीं कर सके। मामला फाइलों में दबा रहा। सूत्रों के अनुसार राय सरकार ने यह फाइल फिर खोली है। अब येोाँच ग्राम विकास आयुक्त से हटा कर उनके मातहत अतिरिक्त ग्राम्य विकास आयुक्त सी. पी. अरुण को सौंपी गई है।ोारी आदेश में मामले की जाँच तत्काल पूरी कर रिपोर्ट देने के लिए भी कहा गया है। इस बार में पूछने पर ग्राम्य विकास आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने ‘हिन्दुस्तान’ से कहा कि काम की व्यस्तता की वाह से उनके पास इसोाँच के लिए समय नहीं है। शासन को पत्र लिख कर उन्होंने किसी अन्य अधिकारी से जाँच कराने का अनुरोध किया था।

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