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आदाब,कबाब यूनेस्को की धरोहर सूची में

अब अपने लखनऊ का आदाब और कबाब, उत्तर प्रदेश की नौटंकी के साथ ही कुमाऊँ की रामलीला भी विश्व धरोहरों की सूची में शामिल होगी। यूनेस्को ने इन्हें ‘विश्व की अमूर्त धरोहरों’ की श्रेणी में रखकर संरक्षण की पहल की है। इस श्रेणी में कवाब की तीनों परम्परागत किस्मों क्रमश: गिलावटी, शामी व काकोरी शामिल कियाोाना है। यूनेस्को मानता है कि कोई संस्कृति व खान-पान किसी न किसी रूप में पारिस्थितिकी (इकोलाॉी) को प्रभावित करते हैं और यह धीर-धीर खत्म हो रहे हैं। तो इनका संरक्षण कियाोाना चाहिए।ड्ढr संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक सामाािक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के कार्यक्रम अधिकारी व दक्षिण एशिया मामलों प्रभारी डॉ. राम बूझ ने बताया कि केवल संस्कृति और कला ही नहीं बल्कि खान-पान को भी संरक्षित कियाोाना चाहिए। यह किसी न किसी तरह पर्यावरण से ताल्लुक रखते हैं। उनके मुताबिक इसके लिए कई देशों ने यूनेस्को के ‘मानवता के लिए अमूर्त धरोहरों’ से संबंधित सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है। भारत भी इसमें शामिल है। इसी के तहत केरल का कुट्टियाटम नृत्य, मैसूर का दशहरा इंटेंोटिबल हेरीटेा यानी अमूर्त धरोहरों की सूची मेंोगह बना चुका है। उनका कहना है कि लखनऊ में कवाब काफी मशहूर है। नवाबों के समय से इसे खान-पान में शामिल कियाोा रहा है। इसके स्वाद का परम्परागत स्वरूप खत्म हो रहा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में नौटंकी व उत्तराखंड में कुमाऊँ की रामलीला भी धीर-धीर कम हो रही है। इसे बढ़ाने के लिए कोशिश कीोाएगी। उनके मुताबिक इस सूची में शामिल करने के लिए कुछ अन्योगहों की परम्पराओं, उनके खान-पान व पहनावा आदि को संरक्षित करने के लिए भारत सरकार से प्रस्ताव माँगा गया है। इस सूची में शामिल होने के बाद इसे बाकी रखने के लिए यूनेस्को अपनी तरफ से कोशिश करगी।

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  • Web Title: आदाब,कबाब यूनेस्को की धरोहर सूची में