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हार पर उबाल, वरिष्ठ भाजपाइयों पर बिफरे कार्यकर्ता

मतगणना के बाद मात्र तीन सौ वोट से हार को भारतीय जनता पार्टी के युवा व समर्पित कार्यकर्ता पचा नहीं सके। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कारगुजारी व बड़बोलेपन पर कार्यकर्ता इस कदर आक्रोशित हो गये कि कई वरिष्ठों को एक कमरे में जाकर जान बचानी पड़ी। जिले में भाजपा के बीच वरिष्ठ नेताओं की अपने बर्चस्व की जंग किसी से छिपी नहीं है। इस विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के भीतर अंर्तकलह खुलकर सामने आने लगी थी।

वरिष्ठ पदाधिकारी भी गुटों में बंटे नजर आये। इस सबके बीच पार्टी कार्यकर्ता देवेन्द्र शर्मा को टिकट मिलने के बाद युवा कार्यकर्ता व युवा मोर्चा के पदाधिकारियों ने जी जान लगाकर देवेन्द्र के पक्ष में चुनाव प्रचार प्रसार किया। दिन रात मेहनत की, लेकिन बावजूद इसके प्रत्याशी की मात्र 501 वोट से हार पर वह उबाल खा गए। फिर क्या था हाइवे स्थित एक पार्टी प्रत्याशी के यहां सभी भाजपा के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। वहां बातों ही बातों में वह कार्यकर्ताओं को अनुशासन और तमाम सीख पढ़ा रहे थे। सूत्रों की मानें तो यह बात जी जान से जुट कार्यकर्ताओं को सहन नहीं हुई। और उनमें इस कदर आक्रोश भर गया कि वह वरिष्ठों की वरिष्ठता को दर किनार करते हुए उन पर बिफर पड़े। युवाओं के आक्रोश को देख वरिष्ठ नेता एक कमरे में चले गये। इसदौरान दो युवकों में हाथापाई भी हो गयी। इसदौरान कई कार्यकर्ताओं ने चीख चीख कर एक जाति विशेष के पार्टी जनों के खिलाफ जहर उगलते हुए कहा कि पार्टी के कुछ मठाधीश व गददारों को हटाओ तभी कुछ हो सकता है। अगर सभी मिल कर काम करते तो मथुरा से सीट नहीं छिनती। जिलाध्यक्ष ठा. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो केवल उपद्रव करते हैं, वह भाजपा के संस्कारित लोग नहीं थे। कुछ युवकों ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों बांके बिहारी माहेश्वरी और रविकांत गर्ग आदि से अभद्रता करने का प्रयास किया, इन्हें सुरक्षा की दृष्टि से एक कमरे में ले जाया गया। मारपीट की कोई घटना नही हुई है। बाद में सभी को शांत कर दिया गया।

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