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आपदा प्रबंधन के 65.47 करोड़ की राशि डायवर्ट

झारखंड में वर्ष 2003 से 09 के दौरान कृषि बीज, संयंत्र की खरीद और वितरण में घपला किया गया है। निगरानी जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इसकी पुष्टि करते हैं। अब तक के जांच और अनुसंधान में 60 करोड़ से अधिक के घपले की पुष्टि हो चुकी है।

अफसरों ने हाइब्रिड धान बीज की खरीद जिस कंपनी से दिखाई थी, वास्तव में वह दवा बनाती है। कोलकाता की कंपनी वेस्ट बंगाल फार्मास्यूटिकल से धान बीज की खरीद दिखाई गई है। निगरानी के डीएसपी शिवचंद्र चौधरी जब वहां पहुंचे, तो दंग रह गए। उन्होंने रिपोर्ट न्यायालय को सुपुर्द कर दी है।

इसके अलावा जांच में पाया गया कि हाइब्रिड बीज बनाने वाली नेरामेड पुणे की और नेफर्ड लुधियाना की कंपनी है। दोनों कंपनियों ने लिखित जानकारी दी है कि उन्होंने झारखंड में धान बीज की आपूर्ति नहीं की है।

जबकि अफसरों ने इन दोनों कंपनियों से धान बीज खरीदने और उसे किसानों में बांटने से संबंधित दस्तावेज दिए थे। इसमें धान के दो बीज डीआरआरएच-1 और केएचआर-2 खरीदने की बात कही थी। कृषि विभाग द्वारा 19 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान बीच की खरीद संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जो गलत पाए गए।

अब तक की कार्रवाई
घोटाले की सूचना पर न्यायालय के आदेश पर निगरानी कांड संख्या 11-09 के तहत पूर्व कृषि निदेशक निस्तार मिंज, पूर्व कृषि मंत्री नलिन सोरेन और पूर्व अधिकारी बी जयराम को नामजद अभियुक्त बनाया गया

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