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दशम ग्रंथ विरोध के नाम पर खिंचा कृपाण

श्री गुरु गोबिन्द सिंह रचित श्री दशम ग्रंथ के विरोध में लौहनगरी में कृपाण खिंच गयी। शोर-शराबे के बीच एक युवक हरविन्दर सिंह के हाथ में मामूली खरोंच आयी। इस मामले में बिल्ले नामक युवक की शिकायत पुलिस से की गयी है। साकची गुरुद्वारा साहिब में सिख संगत को श्री दशम ग्रंथ की जानकारी दे रहे तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पटना बिहार के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह जरा भी विचलित नहीं हुए। डेढ़ घंटे संगत के बीच उन्होंने गुजार और पुरस्कारों एवं सिरोपा का वितरण करते रहे। उन्होंने संगत से अपील की कि वे पंथ विरोधियों का डटकर मुकाबला करं। कुछ मिश्नरियों के हाथों में खेल रहे गुमराह तत्वों को अभी मुंहतोड़ जवाब नहीं दिया गया, तो भविष्य में पंथ को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार यह सर्वविदित है कि व्यभिचारी स्त्रियों से जुड़ी ऐतिहासिक कहानियों का उल्लेख श्री दशम ग्रंथ में किया गया है। यह दशम पातशाह की मौलिक रचना नहीं है। उन पात्रों का उल्लेख करते हुए गुरु जी ने बुराइयों से सिखों को बचने का तरीका बताया है। पंथिक सिद्धांत के अनुसार परमेश्वर पुरुष एवं जीव स्त्री हैं। इनके बीच के संबंध को मजबूत करने के लिए पति-पत्नी के संबंधों का जिक्र आदि ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में है। भाटों की वाणी पर सवाल उठाने के बाद मात खा चुकी मिश्नरियां ही पंथ में भटकाव पैदा करने में लगी हुई हैं। वहीं सिखों की सर्वोच्च पीठ श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार गुरबचन सिंह ने हिन्दुस्तान को बताया कि श्री दशम ग्रंथ साहिब पर किसी तरह का निर्णय लेने के लिए एसजीपीसी को सिख इतिहासकार एवं बुद्धिाीवीयों की कमेटी गठित करने का हुक्म दिया जा चुका है। जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह जानकार एवं सुलझे हुए व्यक्ित हैं और किसी संदर्भ में श्री दशम ग्रंथ का उल्लेख उन्होंने किया है, तो उस पर चिंतन के बजाय विरोध ठीक नहीं है।

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