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एटमी ऊचरा से ही विकास संभव

भारत के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने का सपना परमाणु ऊरा के रास्ते से ही होकर गुजरता है। परमाणु ऊरा स्वच्छ भी है। इसलिए एक जिम्मेदार राष्ट्र होने के नाते उसे इसके इस्तेमाल पर जोर देना होगा। सोमवार को इंडिया इकोनामिक समिट में परमाणु ऊरा और भारत का भविष्य विषय पर विशेषज्ञों की सारगर्भित चर्चा में मोटे तौर पर यह निष्कर्ष निकला। मैकेंसे एंड कंपनी के निदेशक अदिल जनउभाई ने कहा कि भारत की ऊरा की मांग में तेजी से इजाफा हो रहा है। एक बात यह भी है कि वर्तमान में भारत में स्वच्छ ऊरा का भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इन बातों का उत्तर परमाणु ऊरा में है। उन्होंने भारतीय शहरों में डीाल के उपयोग के बढ़ते चलन पर निराशा जताते हुए कहा कि पावर बैक अप के लिए डीाल का सहारा लेना उचित नहीं माना जा सकता। इसी क्रम में लंदन स्कूल ऑफ इकोनामिक्स में प्रोफेसर डा.निकोलस स्टेम ने अक्षय ऊरा के इस्तेमाल को और व्यापक करने पर जोर दिया। वे मानते हैं कि दुनिया के जिम्मेदार राष्ट्र होने के नाते भारत को चाहिए कि वे अक्षय ऊरा का इस्तेमाल करने वालों को टैक्स में राहत दे या किसी अन्य तरीके से प्रोत्साहित कर। उधर,ाीई इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ तेजप्रीत सिंह चोपड़ा ने कहा कि दुनिया की ऊरा खपत सालाना 1.5 फीसदी से लेकर 1.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। यह गति इतनी अधिक है कि किसी भी देश के लिए इसे झेलना असम्भव है। तेल के भावों में नरमी-गरमी का दौर चलता ही रहता है, इस तथ्य की रोशनी में परमाणु ऊरा के प्रति निर्भरता का बढ़ना निश्चित है। चोपड़ा ने कहा कि भारत सरकार का परमाणु ऊरा को महत्व देना उसकी दूरदर्शिता को दर्शाता है।

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