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खूबियां जो ‘विराट’ व्यक्तित्व बनाती हैं

खूबियां जो ‘विराट’ व्यक्तित्व बनाती हैं

एशिया कप के लिए विराट कोहली को टीम इंडिया का उपकप्तान बनाए जाने को देश में युवा क्रिकेटरों को बढ़ावा देने की एक नई लहर का संकेत माना जा रहा है।

विराट को वेस्ट दिल्ली अकादमी में पिछले 12 साल से ट्रेनिंग दे रहे कोच राजकुमार शर्मा उनकी क्रिकेटीय खूबियों के बारे में पूछने पर कहते हैं कि, ‘विराट आक्रामक तेवर वाला एक निडर लीडर है। चुनौतियों से कभी नहीं घबराता, वह हमेशा पॉजिटिव रहता है बोल्ड फैसले लेता है। उसकी यह खूबी एकदम स्पष्ट दिखाई देती है। इसलिए उसे बहुत जल्दी दिल्ली की रणजी टीम, आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर टीम और इससे पहले अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी सौंप दी गई थी।’

दिल्ली के पूर्व रणजी खिलाड़ी राजकुमार का कहना है कि, ‘इस उम्र में योग्यता के साथ इतनी आक्रामकता मैंने किसी और खिलाड़ी में नहीं देखी है। उसके पास बेहतरीन क्रिकेट दिमाग है। वह एक फाइटर है और हमेशा पॉजिटिव रहता है। इसीलिए मैं कहता हूं कि वह एक अच्छा टेस्ट क्रिकेटर बनेगा।’

विराट में ऐसी क्या खूबियां हैं जिससे वह तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर रहा है? राजकुमार ने कहा, ‘विराट जब 9 साल का था तब से मेरे पास कोचिंग ले रहा है। वह शुरू से ही अलग दिखता था। उम्र में अपने से बड़े खिलाड़ियों से आउट नहीं होता था। अभ्यास के दौरान ज्याद बातचीत नहीं करता और खेल पर ही पूरी तरह से फोकस रखता है।

जब खाली होता था तब भी एक-दो खिलाड़ियों के साथ बल्ला उठाकर अकेले नॉकिंग करता रहता था। कभी बारिश की वजह से मैदान गीला होता था तब वह सीमेंट की पिच पर बल्लेबाजी करने लगता था। वह हर समय बस क्रिकेट को जीता है।’

पिछले दो साल में विराट की मैदान के बाहर की गतिविधियों में कुछ बदलाव आया है? इस पर राजकुमार ने कहा, ‘जब पहली बार आईपीएल हुई थी तो वह युवा था और अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान था। उसके चाहने वाले भी एकदम से बढ़े थे तो वह चर्चित हो गया था। लेकिन मैं अब जब कभी भी चेक करता हूं तो उसे ज्यादातर समय घर में ही पाता हूं। अब वह बदल गया है। मैंने उसे एक बार समझाया था कि आप जो कुछ भी हो क्रिकेट की वजह से हो। इसलिए क्रिकेट में कभी कमी मत आने देना। तब से वह ऐसा ही कर रहा है और सारा ध्यान क्रिकेट पर लगाकर रखता है। इस समय अपनी उम्र से अधिक परिपक्व खिलाड़ी हो गया है। वह भावुक नहीं होता है और जो करना चाहता है उसके लिए पूरा दमखम लगाता है।’

भारत के अनेक पूर्व क्रिकेटर विराट को उपकप्तान बनाए जाने की प्रशंसा कर रहे हैं। 1983 की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य कीर्ति आजाद ने तो कुछ समय पहले यह सुझाव दिया था कि, ‘विराट को चार-पांच साल के लिए उपकप्तान बनाया जाना चाहिए, जिससे वह भविष्य के लिए बेहतर कप्तान के रूप में तैयार हो सके।’ लेकिन एक अन्य पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर विराट को उपकप्तान बनाए जाने से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि, विराट को उप कप्तान बनाना गौतम गंभीर के साथ अन्याय है। विराट के सामने अभी कई मौके हैं और वह भविष्य के भारतीय कप्तान हैं लेकिन इससे पहले उन्हें टीम में अपनी जगह मजबूत करनी होगी। श्रीलंका के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है लेकिन तब भी उन्हें और अनुभव प्राप्त करने की जरूरत है।’


विराट आक्रामक कप्तान है और नए खिलाड़ियों को खूब मौका देता है। वह मैदान में पूरे समय खिलाड़ियों को जगाकर रखता है। खिलाड़ियों को प्रेरित करने का उसका अपना तरीका है। जिम्मेदारी उठाने में नहीं चूकता। एक मैच में बोनस अंक दिलाने के लिए ओपनिंग करने चला गया और मैच जिताकर लौटा था। वह ग्रीन टॉप पिच पर बल्लेबाजी करने में नहीं घबराता। इससे तेज गेंदबाजों को फायदा होता था। वह ग्रीन पिच रणजी मैचों में रखवाता था और दिलेरी से बल्लेबाजी करता था।
परविंदर अवाना, रणजी क्रिकेटर, दिल्ली

मैं विराट को इस समय नंबर 1 बल्लेबाज मानता हूं। मैं उसकी कप्तानी में दिल्ली रणजी टीम में खेला हूं। वह ऐसा कप्तान है जो खिलाड़ियों की पूरी तरह सुनता है और उनका समर्थन करता है। मैं एक तेज गेंदबाज हूं और उससे कहता था कि अभी और गेंद डालना चाहता हूं तो वह आपको हटाता नहीं बल्कि कहता है, ठीक है डालता रह। विपक्षी टीम और खिलाड़ियों पर पूरा दबाव बनाकर रखता है। गुस्से वाला भी है। लेकिन अगर गेंदबाज को एक ओवर में ज्यादा रन पड़ जाएं तब भी कुछ नहीं कहता।
पवन सुयाल, रणजी क्रिकेटर, दिल्ली

 

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