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दावोस में पूरा होगा जी-20 का एजेंडा

अमेरिका व यूरोपीय देशों के साथ ही भारत और अन्य विकासशील देश दुनिया को वैश्विक वित्तीय संकट से निकालने के लिए सिर खपा रहे हैं। लेकिन विडंबना यह कि दुनिया की दो तिहाई आबादी यानी चार अरब लोग वित्तीय प्रणाली के दायरे से ही बाहर हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) का फोकस इस बड़ी आबादी के कभी न पूर हो पाने वाले सपनों पर है। आगामी जनवरी माह की दावोस बैठक दुनिया के बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्षों के सामने यही अहम सवाल रखने जा रही है। यही नहीं, डब्ल्यूईएफ वह भी देख रहा है जो दुनिया के अधिकांश देशों को अभी तक नहीं दिखा है। यह सब भी इन नीति निर्धारकों और अर्थव्यवस्था को बचाने में लगे सूरमाओं के सामने रखा जाएगा। उदाहरण के तौर पर दुनिया को ऐसे संकट की पुनरावृत्ति से बचाने के लिए कैसा निगरानी तंत्र हो। दुनिया को मंदी से निकालने के लिए संरक्षणवादी प्रवृत्तियों पर अंकुश कैसे लगे। और नौकरियां कैसे बढ़ाई जायें। सीआईसीआई सम्मेलन के लिए भारत आये डब्ल्यूईएफ के वरिष्ठ निदेशक ली होवेल ने हिदुस्तान के साथ बातचीत में कहा कि इस वैश्विक संकट ने विकसित देशों को कठोर सबक पढ़ाया है। उन्हें अब यह नहीं भूलना चाहिये कि एकीकृत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक देश की लचर व्यवस्था का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। यह सवाल अहम है कि वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ ने अमेरिकी बैंकों की ऑडिट प्रक्रिया से मुंह क्यों फेर रखा है। अब हमें वैश्विक स्तर पर इनक्लूसिव ग्रोथ चाहिये। मतलब वैश्विक असंतुलन दूर कर गरीब देशों को विकास की धारा में शामिल करना है। दुनिया में उपभोग का पैटर्न बदल रहा है। इसके लिए संरक्षणवादी प्रवृत्तियों को खत्म करना होगा। सदस्य देशों को चाहिये कि डल्यूटीओ दोहा विकास दौर को निर्णायक दौर पर पहुंचायें। होवेल वैश्विक निगरानी तंत्र स्थापित करने के पक्षधर होते हुये भी नियामक तंत्र के राष्ट्रीय स्तर पर ही बने रहने पर जोर दे रहे हैं। जी-20 की अगली बैठक अप्रैल में संभावित हैं, इसलिए दावोस बैठक दुनिया को संकट और मंदी से निकालने के काम को आगे बढ़ाएगी।

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  • Web Title: दावोस में पूरा होगा जी-20 का एजेंडा