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रूस से रिएक्टर मिलना तय, गोर्शकोव पर अड़ा

स और भारत के बीच चार परमाणु रिएक्टर पर करार होना लगभग तय है। दो रिएक्टर एक-एक हाार मेगावाट और दो 1200-1200 मेगावाट के होंगे। लेकिन विमानवाही पोत एडमिरल गोर्शकोव पर रूस कतई झुक ने को तैयार नहीं। इसका सौदा डेढ़ अरब डार में हुआ था। लेकिन रूस अब इसके लिए 2 अरब डालर अतिरिक्त लेने पर अड़ा हुआ है। रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव संभवत: चार दिसंबर को भारत की यात्रा पर आएंगे। तब इस जटिल मसले पर निर्णायक चर्चा होगी। तब एटमी करार पर भी हस्ताक्षर होंगे। भारत पहले भी इस करार के लिए उत्सुक था लेकिन वाम दलों ने एटमी करार के मसले पर जो नकारात्मक रुख अपना रखा था, उसकी वजह से मनमोहन सिंह की रूस यात्रा के दौरान यह नहीं हो पाया था। तब तक न्यूक्िलयर सप्लायर्स ग्रुप ने भी बंदिशें नहीं हटाई थीं। अब बंदिशें हट चुकी है। इसलिए निरंतर करार हो रहे हैं। सबसे पहले भारत ने फ्रांस से, फिर अमेरिका से और अब रूस से करने जा रहा है। लेकिन ये तभी अमल में आ पाएंगे जब भारत इंटरनेशनल एटोमिक इनर्जी एजेंसी से सेफगार्ड एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर कर देगा। इस एग्रीमेंट के मसविदे पर भारत अपनी मंजूरी दे चुका है लेकिन अभी हस्ताक्षर नहीं किये हैं। इस बीच फ्रांस, अमेरिका और रूस के एटमी ऊरा इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों की भारत यात्रा पर आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी हफ्ते अमेरिका की इंडस्ट्री के लोग आ रहे हैं। रूस के न्यूक्िलयर इंडस्ट्री के मंत्री भी जल्द आएंगे। अमेरिका की कोशिश है कि भारत को एनरिचमेंट टेकनोलॉजी न दी जाए। इसके लिए वह न्यूक्िलयर सप्लायर्स ग्रुप में प्रस्ताव लाएगा।

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