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आविश दे रहा इम्तहान,15 महीने से वेंटीलेटर परं

मामू मैं बड़ा होकर पायलट बनूँगा। रो बादलों को छूऊँगा। आपको भी घुमाने ले चलूँगा। फैय्याा के कानों में आविश के वायदे अब कशिश बनकर गूँा रहे हैं। अविश से आा भी फैय्याा बेहद प्यार करता है। लेकिन अविश अब बोल नहीं पा रहा। वह छत्रपति शाहूोी महाराा चिकित्सा विश्वविद्यालय के बाल रोग विभाग में पिछले 15 महीने से वेंटीलेटर पर है। इंसेफलाइटिस की चपेट में आने के बाद वह अगस्त 2007 से वेंटीलेटर पर है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि सात वर्ष का आविश एक न एक दिन पूरी तरह से ठीक होोाएगा। राय के किसी भी अस्पताल में यह पहली ऐसी घटना हैोबोिंदगी कीोद्दोहद के लिए किसी बच्चे को इतने लम्बे वक्त तक वेंटीलेटर पर रखा गया हो।ड्ढr बस्तीोिले के एक किसान हैदर के पाँच बच्चों में से आविश तीसरे नम्बर पर है। पूर्वाचल में फैले एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम यानी दिमागी बुखार की चपेट में आने के बाद आविश को 24 अगस्त 2007 को चिविवि के बाल रोग विभाग में डॉ. वाईसी गोविल की देखरख में भर्ती कराया गया। बच्चे के इलाा मेंोुटे डॉ. सिद्धार्थ का कहना है किोिस समय आविश को यहाँ लाया गया इंसेफलाइटिस की वाह से उसके हाथ-पैर और साँस की नली लकवाग्रस्त थी। बच्चा कोमा में था और शरीर में तेा झटके आ रहे थे। इंसेफलाइटिस की यह सबसे खतरनाक स्टेा होती है। आविश को नियोनेटल आईसीयू में लगे वेंटीलेटर पर रख लिया गया। वेंटीलेटर केोरिए उसे कृत्रिम तरीके से साँस और दवाईयाँ दीोाने लगीं। धीर-धीर दिन और महीने बीतने लगे। आविश का वेंटीलेटर लगा रहा। लेकिन उसकी स्थिति धीर-धीर सुधरने लगी। इसी ने घरवालों को नया हौसला दिया। आविश केोीवन की आस ने घरवालों को आसरा बँधाए रखा। अब वेंटीलेटर पर आविश को 15 महीने हो गए हैं। उसके हाथ-पैर में हलचन होने लगी है। साँस की नली का लकवा भी ठीक हो रहा है। यही वाह थी कि बीच में 17 दिन के लिए आविश का वेंटीलेटर हटाया गया। लेकिन संक्रमण और साँस लेने में दिक्कत बढ़ने के बाद फिर से वेंटीलेटर लग गया। डॉक्टरों का कहना है कि आविश कब तक ठीक होकर अपने पैरों पर चल सकेगा यह कहना कठिन है। इसमें सालों लग सकते हैं और वेंटीलेटर की आवश्यकता भी लम्बे समय तक रहेगी। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.ोीके मलिक का कहना है कि इंसेफलाइटिस की इसोटिल अवस्था में बच्चे से बड़ी परीक्षा घरवालों की होती है। आविश के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। परिानों ने सिटी स्टेशन के निकट एक कमरा किराए पर ले लिया है। वेंटीलेटर का प्रतिदिन का खर्च 500 रुपए मिलाकर दवाओं आदि का खर्च 15 सौ रुपए प्रतिदिन आ रहा है। मामा फैय्याा का कहना है कि आविश के मैंने अपनी मुम्बई के कुर्ला में दुकान भी बेच दी है। आविश के माँ-बाप, दो मामा और तीन मौसी लगातार आविश की सेवा मेंोुटे हैं। ं

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