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23 फरवरी, 2020|7:02|IST

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हिट गीतों ने आम आदमी तक पहुंचाया : शहरयार

शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं है रिश्ता ही मेरी प्यास का पानी से नहीं है दिल चीज है क्या आप मेरी जान लीजिए इन आंखों की मस्ती में पैमाने हजारों हैं सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों हैं इस शहर में हर शख्स परशान सा क्यों है इन मकबूल गीतों के रचयिता प्रसिद्ध शायर शहरयार का नाम हिन्दी व उर्दू साहित्य में एक जाना-पहचाना व अदब से लिया जाने वाला नाम है। वे जितने लोकप्रिय भारत में हैं पाकिस्तान में भी उनकी उतनी ही शोहरत है। वे कहते हैं कि फिल्मों में गीत लिखना मेरा पेशा नहीं है पर इन हिट गीतों ने मुझे आम आदमी तक पहुंचा दिया।ड्ढr ड्ढr जश्ने-बहार व तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा आयोजित ‘मुशायरा’ में शिरकत करने आए कुंवर अखलाक मोहम्मद खान उर्फ शहरयार ने सोमवार को ‘हिन्दुस्तान’ से खास मुलाकात में अपनी साहित्यिक सफर पर विस्तार से रोशनी डाली। गालिब को अपना आदर्श मानने वाले शहरयार साहब कहते हैं कि मैं भी उनकी तरह आम लोगों की जिंदगी की उलझनों व दर्द को अपनी रचनाओं में शामिल करता हूं। मशहूर शायर फैज अहमद फैज, फराज व राशिद भी शहरयार के प्रशंसकों में है। बारह साल पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्रोफेसरी की नौकरी से रिटायर हो चुके शहरयार ने सन् 58 से लिखना शुरू किया। उनकी पहली पुस्तक सन् 65 में ‘अस्मे आजम’ नाम से छपी व दूसरी किताब सातवां दर सन् 70 में आयी। अब तक उनकी कुल 14 किताबें छपी हैं जिसमें आठ हिन्दी में हैं।

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