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म्यूजिक बॉक्स यानी गोली-पिस्तौल का बक्सा

पटना पुलिस की मेहनत व मशक्कत आखिरकार रंग लाई। लंबे समय से हथियार सप्लायरों की टोह में लगी पुलिस ने पूरी होशियारी के साथ सबसे पहले गिरोह के एक अहम मोहर संजय सिंह उर्फ संटू शर्मा को अपनी गिरफ्त में ले लिया। पुलिस ने उससे पूछताछ की तो कई अहम जानकारी हाथ लगी। फिर देखते ही देखते घेराबंदी करते हुए और धंधेबाजों को पुलिस ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। 10 शातिर हथियार सप्लायरों की गिरफ्तारी के बाद छानबीन के दौरान पुलिस अधिकारी उस समय चौंक गये जब सप्लायरों के गोला-बारूद सप्लाई करने के तौर-तरीके और विशेष स्टाइल की स्कॉर्पियो का पता चला।ड्ढr ड्ढr दरअसल यह स्कॉर्पियो मेन सप्लायर यानी सरगना ने अपने गैंग के सदस्यों को गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए दिये थे। इसके अंदर हथियार और कारतूस आदि रखने के ऐसे जगह बनाये गये हैं जहां साधारण स्थितियों में चेकिंग के दौरान पुलिस की नजर नहीं पड़ती। म्यूजिक बॉक्स यानी स्पीकर के बक्से के अंदर छोटे हथियार (पिस्तौल-रिवाल्वर) और कारतूस रखने का जगह बनाया है। उसमें बड़ी संख्या में छोटे हथियारों को रखा जा सकता है।ड्ढr सीट के नीचे ऐसा खोल बनाया गया है जिसमें राइफल जैसे बड़े हथियारों के अलावा गोली आदि रख कर लंबी दूसरी तक आसानी से असलहों को कैरी किया जाता है। स्कॉर्पियो के अंदर इन्हीं जगहों पर एक साथ सैकड़ों कारतूस व अन्य हथियार रख कर सप्लायरों के ग्रुप ने माओवादियों तक कई बार असलहे पहुंचाये। पुलिस को चकमा देने के लिए स्कॉर्पियो की नंबर प्लेट पर नंबर (डी.एल.4सी.-एन.बी.-0320) के उपर आर्मी लिखवा दिया था। साथ ही गिरोह के सदस्य अक्सर ट्रांजिट रहते थे जिससे वे पुलिस की नजरों में नहीं आते थे।

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  • Web Title: म्यूजिक बॉक्स यानी गोली-पिस्तौल का बक्सा