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प्रज्ञा को यातना देना बर्बरता : आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी ने मालेगांव विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को पुलिस हिरासत में कथित यातना दिए जाने को बर्बरता करार दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते की कारगुजारियों की न्यायिक जांच कराने और दस्ते के मौजूदा अधिकारियों को हटाने की मांग की है। साध्वी प्रज्ञा द्वारा नासिक की अदालत में दाखिल किए गए हलफनामे में उन्हें शारीरिक और मानसिक यातना दिए जाने के वृतांत से विचलित आडवाणी ने अपने एक कड़े बयान में यह मांग करते हुए कहा कि एक आध्यात्मिक हस्ती और एक महिला के साथ इस तरह के बर्बर व्यवहार की वह कल्पना भी नहीं कर सकते। एक लोकतांत्रिक और विधि के शासन पर आधारित देश में इस तरह की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने साध्वी के आरोपों तथा मालेगांव बम विस्फोटों से सैनिक अधिकारियो कंो जोड़े जाने की न्यायिक जांच कराने की मांग की। अपने बयान में उन्होंने कहा है कि दिल्ली से रायपुर जाते समय विमान में उन्होंने साध्वी का हलफनामा पढ़ा। हलफनामे में साध्वी के आतंकवाद विरोधी दस्ते पर यातना संबंधी आरोपों को पढ़ने के बाद वह इस प्रकरण में बयान देने के लिए मजबूर हुए है। हालांकि अब तक वह इस प्रकरण में कुछ बोलना नहीं चाहते थे। आडवाणी ने कहा कि हलफनामें को पढ़ने से पता चलता है कि किस तरह बर्बरता से जांचकर्मियों ने साध्वी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और भद्दी भद्दी गालियां दीं। उन्होंने कहा कि यह सब पढ़कर मुझे गहरा धक्का लगा है और गहरा क्षोभ हुआ है। पूरा देश भी ऐसा महसूस कर रहा होगा। उधर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मंगलवार को यहां कहा कि मालेगाँव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह के साथ एटीएस की बदसलूकी व प्रताड़ना ठीक नहीं है। इटावा क्लब में एक कार्यक्रम के बाद यादव ने इस बात पर चुप्पी साधे रखी कि साध्वी मालेगांव कांड में संलिप्त है या नहीं। बस इतना ही बोले कि जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक स्थिति चिन्ताजनक है।

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