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कल सेंट्रल हॉल में बच्चों की सुनवाई करंगे स्पीकर

बीस नवम्बर को विधानसभा के सेंट्रल हॉल में अद्भुत नÊाारा होगा। विधानसभा अध्यक्ष तो मौाूद होंगे पर बोलने वालों में माननीय विधायक नहीं बल्कि छोटे-छोटे बच्चे होंगे। उनकी बातों मे शिकायतें तो होंगी पर कोई आरोप-प्रत्यारोप या तल्खी नहीं। बच्चे शांति से उठेंगे, अपनेोिले का नाम बताएँगे और उन समस्याओं को स्पीकर के सामने रखेंगेोो उन्हें अपने शहर, गाँव याोिले में झेलनी पड़ती हैं। खास बात यह है कि यह संसद या विधानसभा के सदन की मॉकड्रिल नहीं बल्कि उससे एकदमोुदा ऐसी सभा होगीोिसका उद्देश्य सिर्फ अपनी बात उचित फोरम पर रखना होगा।ड्ढr यह मौका है अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस का। वर्ष 1में 20 नवम्बर को यूनाइटेड नेशन्स ने बच्चों के अधिकारों को लेकर एक घोषणापत्रोारी किया था। भारत ने इस कन्वेंशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तभी से इस दिन बच्चों के हक सेोुड़े तमाम आयोन होते हैं। इस बार 40 गैर सरकारी संगठनों का ‘चिल्ड्रेन फर्स्ट’ नाम का नेटवर्क सीएमएस गोमतीनगर के ऑडीटोरियम में 20 नवम्बर को बाल संसद का आयोन करनेोा रहा है। इस आयोन में यूनिसेफ, एक्शनएड और अहसास आदि संस्थाएँ खास भूमिका निभा रही हैं।ड्ढr यूनीसेफ के प्रवक्ता ऑगस्टिन के मुताबिक यूपी की आबादी का कुल 46 फीसदी बच्चे हैं। विधानसभा अध्यक्ष सुखराम रााभर ने इस आयोन के लिए अच्छी पहल की है। इस संसद के आयोन से पहले उन्होंने सभी दो सौ बच्चों को विधानसभा के सेंट्रल हॉल में बुलाया है। वहाँ वे खुद इन बच्चों की सभी समस्याओं को सुनेंगे। बच्चों के अलग-अलग समूह अलग-अलग समस्याओं को उनके सामने रखेंगे। सरकारी योनाओं सेोुड़ी इन दिक्कतों को विधानसभा की उन समितियों के सामने रखाोाएगाोो इन मामलों को देखती हैं। अहसास संस्था की महासचिव शचि सिंह ने बताया कि इस बार में बुधवार को संस्थाओं के लोग विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर पूर कार्यक्रम की तैयारी करंगे।

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