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समुद्री लुटेरों के लिए कोई कानून नहीं

समुद्री लुटेरे देश की समुद्री सीमाओं से पर जाकर अपराध करते हैं इसलिए इन्हें किसी देश के कानून के तहत पकड़ना संभव नहीं है। इनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्ंधियां और रूढ़ियां बनी हुई हैं लेकिन कई देश इन संधियों के हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं इसलिए वारदात के समय वह दूसर देश के जल क्षेत्र में जाकर समुद्री लुटेरों को नहीं पकड़ पाते। खतर की बात यह है कि समुद्री लुटेरे बहुत ही संगठित हैं इनके ऊपर अंतरराष्ट्रीय ड्रग व हथियार कार्टेल का हाथ है जो आतंकी संगठनों को हथियारों की सप्लाई करते हैं। मेरीटाइम लॉ के जानकारों का कहना है कि लुटेर जहाज पर लदे माल से ज्यादा जहाज में ज्यादा रुचि रखते हैं। जहाज अरबों डालर के होते हैं एक बार अगवा होने के बाद जहाज के फर्ाी कागज बनाना कठिन नहीं है। उन्होंने बताया कि जहाज के फर्ाी दस्तावेज बनवाना किसी वाहन के दस्तावेज बनवाने से भी आसान है। इसकी वजह ढीली पंजीकरण प्रक्रिया तथा जहाजों पर नजर रखने के लिए केंद्रीयकृत एजेंसी का अभाव है। हालांकि अगवा जहाज या तो ब्रेकिंग यार्ड में तोड़ने के लिए बेच दिया जाता है या उसे कोई शिपिंग कंपनी खरीद लेती है। भारत ने समुद्री लुटेरों निपटने के लिए रोम के साथ मेरीटाइम संधि पर जनवरी में ही हस्ताक्षर किए हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। क्योंकि अधिकतर पाइरसी की घटनाएं दक्षिण पूर्व एशिया के समुद्री क्षेत्र में हो रही हैं।

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