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लॉटरी चलाने के पीछे है बड़ा ‘गेम’

झारखंड सरकार लॉटरी कारोबार को प्रतिबंधित करने का नीतिगत फैसला तो ले चुकी है, लेकिन इसपर कैबिनेट की मुहर अब तक नहीं लगी है। इसके पीछे सोची-समझी रणनीति बतायी जा रही है। जब तक कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिलती है, तब तक कोई भी फैसला कानूनी रूप लेता। यही वजह है कि मेसर्स सुगल एंड दमानी इंटरप्राइजेज प्रा. लिमिटेड को राज्य में लॉटरी का कारोबार करने के लिए अनुमति पत्र मिल गया है।ड्ढr यह झारखंड की सरकारी व्यवस्था का विरोधाभास ही है कि एक ओर वित्त विभाग लॉटरी कारोबार को पूर्णत: प्रतिबंधित करने के लिए संलेख कैबिनेट भेज चुका है, वहीं दूसरी ओर एक कंपनी को लॉटरी चलाने की अनुमति भी दे दी गयी है। कंपनी ने जब लॉटरी चलाने की अनुमति मांगी तो उससे कहा गया कि यहां फिलहाल लॉटरी पर प्रतिबंध का कानून नहीं है। लॉटरी चलाने की दिशा में कंपनी आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। जाहिर तौर पर लॉटरी के पीछे एक बड़ा खेल है। शीर्ष स्तर पर एक लॉबी है, जो चाहती है कि राज्य में लॉटरी का व्यवसाय है। सूत्रों के अनुसार इसी लॉबी की वजह से लॉटरी को प्रतिबंधित करने के फैसले को कानूनी जामा नहीं पहनाया जा रहा है। मालूम हो कि लॉटरी के इस कारोबार से राज्य सरकार को किसी प्रकार की अतिरिक्त राजस्व की आमदनी की संभावना नहीं है। इस पर किसी प्रकार की करदेयता नहीं है। डिप्टी सीएम व वित्त मंत्री स्टीफन मरांडी लॉटरी कारोबार को प्रतिबंधित करने के पक्षधर हैं। उन्होंने ऐसा ही आदेश फाइल पर किया है। लेकिन उनके विभाग में लॉटरी चलाने के लिए स्वीकृति पत्र कंपनी को भेज दिया है।

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