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भारत-अरब के बीच सांस्कृतिक उछाल

अरब और भारत के रिश्ते नई ऊंचाइयों तक ले जानी की कोशिश जारी है। तेल तो हम वहां से लेते ही हैं। हाल ही में अरब देशों की नई पहचान भारत में रीअल्टी क्षेत्र और कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग में निवेश करने वाले के रूप में भी उभरी। अब अरबी संगीत, नृत्य, फिल्म, मूर्तिशिल्प, ओपेरा आदि की वजह से अरब देशों की नई पहचान भारतीयों के सामने आएगी। भारत अरब रिश्तों को नया रूप देने के लिए इंडिया-अरब फोरम की स्थापना की गई थी। इसे भारत अरब रिश्तों के नजरिये से हाल के इतिहास में सबसे बड़ी पहल करार दिया गया। लेकिन इसका कामकाज अभी तक आर्थिक दायर में ही दिखाई दिया। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) एन रवि के अनुसार भारत और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंध तो सदियों पुराने रहे हैं। मसलन ओमान में गुजराती व्यापारियों की पांचवीं छठी पीढ़ी तक मिल जाती है। लेकिन फोरम अब सांस्कृतिक स्तर पर एक दूसर को समझने की नई पहल कर रहा है। इसके लिए दिल्ली में छह दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किया जा रहा है। दो दिसंबर को इसका उद्घाटन अरब लीग के महासचिव मूसा और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी संयुक्त रूप से करंगे। आयोजन की जिम्मेदारी फिक्की ने स्वीकार की है। कार्यक्रम छह दिन चलेगा। भाग लेने ओमान, फिलस्तीन और मिस्र् और मोरक्को के संस्कृति मंत्री भी आ रहे हैं। बारह अरब देशों के करीब 200 कलाकार भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हाल ही में कतर और ओमान गये, तो मिस्र् के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक भारत आये। गुरुवार को तुर्की के प्रधानमंत्री तैय्यप अर्दोगान भारत पहुंचे। अर्दोगान शुक्रवार को भारतीय नेताओं से आर्थिक से लेकर सभी मसलों पर चर्चा करंगे।

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