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अब दूध-दही का भी होने लगा आयात

देश में पशुपालन को बढ़ावा देने के नाम पर सालाना करोड़ों रुपये बहाने का परिणाम यह है कि चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान दूध और इससे बने उत्पादों का आयात 226.7 फीसदी बढ़ गया है। वैसे एक जमाने में भारत को दूध और घी की नदियां बहाने वाला देश माना जाता रहा है। इन उत्पादों में मिल्क क्रीम और बटर ऑयल का आयात ज्यादा हुआ है। यही नहीं देश में उद्यमिता विकास और लघु एवं मझोले उद्योग को विशेष बढ़ावा देने का परिणाम भी सामने है। इसी अवधि में रोमर्रा के छोटे उत्पादों का आयात 48.7 फीसदी बढ़ गया है। इनमें छाता, ताले, लेखन सामग्री, टाइल्स, और प्लास्टिक गुड़ियां आदि मुख्य रूप से शामिल हैं। इस बात का खुलासा वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी संवेदनशील उत्पादों के आयात संबंधी जारी आंकड़ों के जरिये हुआ है। बीते वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान संवेदनशील उत्पादों का आयात 30.5 फीसदी बढ़कर 43000.8 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। आर्थिक संकट अपनी जगह है लेकिन बड़े-बड़े होटलों में महंगी चाय और कॉफी का रिवाज लगातार बढ़ रहा है। नतीजतन, इनका आयात 41.7 फीसदी बढ़ा है। विदेशी कारों और शराब के शौकीनों की संख्या भी बढ़ी है। विदेशी कारों और उनके पुर्जो का आयात 2ीसदी बढ़ा है। विदेशी शराब का आयात 37.1 फीसदी बढ़ा है। खाद्य तेल का आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। इसके आयात में 42.3 फीसदी बढ़ा है। चिंताजनक यह है कि रिफाइंड खाद्य तेल का आयात 126.5 फीसदी बढ़ा है।ं

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