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10 अप्रैल, 2020|1:13|IST

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चिदंबरम पर निचली अदालत करेगी फैसला, 122 लाइसेंस रद्द

चिदंबरम पर निचली अदालत करेगी फैसला, 122 लाइसेंस रद्द

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा के कार्यकाल में आवंटित किए गए 2जी के स्पेक्ट्रमों के लिए सभी 122 लाइसेंसों को रद्द करते हुए कहा कि मामले में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को सह आरोपी बनाने पर फैसला निचली अदालत करेगी।

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और ए. के. गांगुली की खंडपीठ ने कहा कि घोटाले की जांच कर रहा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अपनी रिपोर्ट केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को सौंपेगा।  

खंडपीठ ने सीबीआई जांच पर नियमित नजर रखने के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन की मांग पर कहा कि रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद सीवीसी अपनी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में सर्वोच्च न्यायालय को देगा। खंडपीठ ने कहा कि स्वच्छ प्रशासन चाहने वाले प्रबुद्ध नागरिक अगर ऐसी पहल नहीं करते तो आम लोगों को कभी भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई गड़बड़ियों का पता नहीं चलता।

अदालत ने कहा कि जिन कम्पनियों के लाइसेंस रद्द होंगे वे चार महीनों तक दूरसंचार सेवा देती रहेंगी और इस अवधि में दूरसंचार नियामक मामले पर विचार करते हुए नए सिरे के नीलामी के लिए सुझाव देगा।

न्यायालय ने यूनिटेक, स्वान टेलीकॉक और टाटा टेलीसर्विसेज पर पांच-पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि इस राशि का आधा न्यायालय के कानूनी सहायता सेवाओं और बाकी धन रक्षा सेवाओं को दिया जाएगा। अन्य कम्पनियों पर अलग-अलग जुर्माना लगाया गया है।

यह पूरा फैसला स्वामी द्वारा पूरे मामले में चिदम्बरम की भूमिका की जांच की मांग सम्बंधी याचिका पर आया है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी लाइसेंस रद्द करने के लिए याचिका दायर कर रखी थी।

सुब्रहमण्यम स्वामी का दावा है कि 2-जी घोटाले के लिए जितने दोषी पूर्व संचार मंत्री ए राजा हैं उतने ही गृह मंत्री पी चिदंबरम भी हैं, लिहाजा उन्हें भी सह आरोपी बनाया जाए। 

स्वामी के इन आरोपों को सरकार यह कहकर खारिज करती रही है कि 2-जी घोटाले में जो कुछ किया है वो उस समय के संचार मंत्री ए राजा ने किया है। लेकिन सुब्रहमण्यम स्वामी ने साक्ष्यों के आधार पर साबित करने की कोशिश की है कि घोटाले में पी चिदंबरम का भी हाथ है।

सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने मांग की थी कि ए राजा के मंत्री रहते बांटे गए 2-जी के सभी 122 लाइसेंस रद्द किए जाएं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च 2011 को सुनवाई पूरी कर ली थी।

गौरतलब है कि अदालत में लगातार यह दलील दी गई है कि सीबीआई पर सरकार का नियंत्रण है, लिहाजा मामले की जांच के लिए बेदाग अधिकारियों को लेकर एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम बनाई जाए।

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  • Web Title:सरकार को कोर्ट ने दिया तगड़ा झटका, 122 लाइसेंस रद्द