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इन छात्रों को कौन देगा डिग्री

ला एवं शिल्प महाविद्यालय (आर्ट्स कालेा) में बीएफए (ट्रेडिशन स्कल्पचर) के छात्रों का भविष्य दाँव पर है। चार वर्ष के इस कोर्स मेंोब डिग्री बँटने का समय आया तो कोर्स के ऊपर ही सवालिया निशान लग गए। बिना मान्यता के चलाएोा रहे इस कोर्स को अब तक किसी भी विभाग से संबद्ध नहीं किया गया है। ऐसे में अब छात्रों को डिग्री कहाँ से मिलेगी यह तय नहीं है। इस मामले को रााभवन ने भी संज्ञान में लिया है और कोर्स पर सवाल उठाते हुआोवाब-तलब किया है। 14 हाार रुपए प्रति वर्ष फीस देकर यह कोर्स पढ़ रहे छात्रों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।ड्ढr बीएफए (ट्रेडिशनल स्कल्पचर) का कोर्स वर्ष 2005-06 में खोला गया था। इस कोर्स में छात्रों को भारत की पारम्परिक मूर्ति कला के बार में पढ़ायाोाता है। लविवि नेोब कोर्स शुरू किया तो इसे किसी भी विभाग से संबद्ध नहीं किया। ऐसे में कोर्स बगैर मान्यता के ही चलता रहा। अकेले लावारिस चल रहे इस कोर्स में 26 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।ड्ढr इस बार में कला एवं शिल्प महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पी. रााीव नयन का कहना है कि यह कोर्स दो शिक्षकों ने अपनी मर्ाी से शुरू कर दिया था। वह क्ले माडलिंग के सार्टिफिकेट कोर्स का उच्चीकरण कर उसे डिग्री कोर्स बनाना चाहते थे। तत्कालीन कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने इस कोर्स को चलाने की क्षाात तो दे दी लेकिन यह तय नहीं किया कि इस कोर्स को किस विभाग से संबद्ध कियाोाएगा। प्रत्येक कोर्स किसी न किसी विभाग के अधीन ही चलता है। ऐसे में बिना विभाग के अकेले चल रहे इस कोर्स को कहाँ से डिग्री दिलवाईोाए। मामले की शिकायत रााभवन में होने के बाद कुलाधिपति ने भी इस कोर्स पर सवालिया निशान लगाए हैं। सबसे अधिक परशाान आखिरी साल के वह छात्र हैंोिन्हें थोड़े ही दिन बाद डिग्री मिलने वाली है। इस कोर्स में पढ़ रहे छात्र अपने भविष्य को लेकर खासे चिंतित हैं।ड्ढr मामले पर रााभवन के हस्तक्षेप के बाद उन्हें भय है कि इस कोर्स को बंद कर दियाोाएगा। बीएफए (ट्रेडिशनल स्कल्पचर) के शिक्षक डॉ. लालोीत अहीर का कहना है कि यह कोर्स भले ही किसी विभाग के अधीन न हो लेकिन छात्रों को बेहतर पढ़ाई करवाईोा रही है। अगर इस कोर्स को किसी विभाग से संबद्ध नहीं किया गया तो छात्रों की मेहनत पर पानी फिरोाएगा।

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