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स्ट्रीक्चर के बाद भी क्यों अध्यक्ष बनाया गया

एचबी लाल को जेएसइबी का चेयरमैन बनाये जाने के मामले में कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र एवं जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट ने सरकार को यह बताने को कहा है कि जिस व्यक्ित के खिलाफ कोर्ट ने पूर्व में ही स्ट्रीक्चर पास किया है और जिसे पूर्व मुख्य सचिव ने अयोग्य करार दिया है, उस व्यक्ित को पुन: अध्यक्ष क्यों बनाया गया। कोर्ट ने एचबी लाल को भी नोटिस जारी किया है।ड्ढr इस संबंध में सहोदर महतो ने याचिका दायर कर सरकार की उस अधिसूचना को निरस्त करने का आग्रह किया है जिससे लाल को चेयरमैन बनाया गया है। प्रार्थी का कहना है कि एचबी लाल 85 वर्ष के हैं। वर्ष 2001 में सरकार उन्हें जेएसइबी का चेयरमैन बना रही थी। तत्कालीन मुख्य सचिव वीएस दुबे ने एचबी लाल को अयोग्य माना था । इसके बाद उन्हें चेयरमैन नहीं बनाया गया। वर्ष 2004 में लाल को बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया। इस दौरान बोर्ड की हालत खराब हो गयी थी। उस समय हाइकोर्ट ने बिजली बोर्ड एवं यहां के अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की थी। कोर्ट ने सरकार को इस पर ध्यान देने को कहा था और कहा था कि अयोग्य लोगों के कारण बोर्ड की हालत नहीं सुधर रही है। कोर्ट के इस आदेश के बाद लाल को चेयरमैन के पद से हटा दिया गया था। लाल ने अपने कार्यकाल के दौरान गलत तरीके से रिटायर लोगों की नियुक्ित की थी। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और नियुक्ित रद्द कर दी थी। अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। वरीय अधिवक्ता सोहैल अनवर और राजेश कुमार ने बहस की।

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