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दो टूक

विचार और शोषण की दुहाई देकर समानांतर सत्ता चलानेवाले नक्सलियों ने बच्चों के भविष्य के साथ खेलकर अच्छा नहीं किया। लातेहार के दो सौ स्कूल भवनों का निर्माण नक्सलियों ने लेवी के लिए रोक दिया है। उनमें उनके बच्चे भी पढ़ते। भविष्य का ककहरा पढ़कर जब बच्चे निकलते, तो नक्सलियों की आंखें खुलतीं। अपने बच्चों की नजरों से वे भी देख पाते-कैसे बदल रहा है, कैसे बदल सकता है समाज। विभ्रम के घटाटोप में क्षणिक उाियारे की जो आस थी, उसपर पर्दा डाल नक्सलियों ने बेरहम जिंदगी की आग में डाल दिया है बच्चों का भविष्य। नक्सलियों की लड़ाई सरकार, अधिकारियों से है, उनके खिलाफ वे अपने तरीके से लड़ ही रहे हैं। पर, स्कूलों में बच्चों की आवाजाही में खलल डालकर वे अपने समर्थकों की नाराजगी से भी बच नहीं पायेंगे।ड्ढr

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