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तीन साल में तमाम क्षेत्रों में व्यापक सुधार हुआ है: नीतीश

तीन साल बाद आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती ?ड्ढr तीन साल में सभी क्षेत्रों में सुधार हुआ है। आधारभूत संरचना को और मजबूत करने की जरूरत है। अभी धन के रहते तेजी से काम नहीं हो पाता है। यह चुनौती है। नगर विकास, ग्रामीण सड़क, अस्पताल भवन निर्माण के लिए अपनी एजेंसी की जरूरत है। निर्माण क्षेत्र में हम कई निगम बनायेंगे। इसके अभाव में हमारा पैसा केन्द्रीय एजेंसियों के पास जा रहा है। उनके काम की गति भी धीमी है। धन है फिर भी पटना की सड़कें नहीं बन पायी। जैसा शासन मिला था उसमें तो दो-तीन सौ करोड़ रुपये खर्च करना भी मुश्किल सा था। अब तो सिर्फ सड़क पर तीन हजार करोड़ खर्च कर रहे हैं। ऐसी ही क्षमता अन्य क्षेत्रों में भी विकसित करनी होगी।ड्ढr और कहां समस्या है ?ड्ढr भूमि विवाद के मामले कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती हैं। जमीन के कागजात अप टू डेट नहीं हैं। जमीन की मिल्कियत बदल रही है। हमने सभी एसपी को भूमि विवाद के 10-10 मामलों की समीक्षा का आदेश दिया है। जांच होगी कि इनमें पुलिस की भूमिका कैसी रही है।ड्ढr कोसी संकट को विकास और राजनीतिक दृष्टि से कितनी बड़ी क्षति मानते हैं?ड्ढr इस वर्ष कोसी क्षेत्र में नयी तरह की समस्या आ गयी। संकट से निबटने और लोगों को राहत पहुंचाने में अधिक काम करना पड़ा। दूसर क्षेत्रों में काम रोक कर वहां की मशीनरी और संसाधन को कोसी क्षेत्र में लगाना पड़ा। इससे न तो विकास में बाधा आई और न हमें कोई राजनीतिक नुकसान हुआ है। बयानबाजी करने पर तो कोई रोक है नहीं लेकिन सभी प्राकृतिक आपदाओं के लिए आदमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। राज्य का तेज विकास हो रहा है। हमने पिछले वर्ष 2.5 करोड़ लोगों के बीच अपने बलबूते राहत अभियान चलाकर रिकॉर्ड बनाया था। केन्द्र से एक पैसा नहीं मिला। इस वर्ष भी लोगों को भरपूर मदद दी गयी। पहली बार 4.5 लाख लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया। रोमर्र की जरूरतों के अलावा पर्व के मौके पर विशेष इंतजाम किये गये।ड्ढr शासन की सबसे बड़ी उपलब्धि ?ड्ढr लोगों में भय नहीं है। आत्मविश्वास बढ़ा है। पटना की बात तो छोड़ दीजिए, गांवों में भी किसी को रात में घर से निकलने में डर नहीं लगता। हर तरह के अपराध में कमी आई है। हम जब शासन में आए तो अपहरण छोड़कर बाकी सभी उद्योग-धंधे बन्द थे। सबसे पहले अपहरण उद्योग बंद हुआ। स्पीडी ट्रायल से 25 हाार अभियुक्तों को सजा मिली। हथियारों का प्रदर्शन नहीं हो रहा। पूरी तरह अपराध खत्म होने का दावा कोई नहीं कर सकता। देखना यह होगा कि अपराध रोकने में पुलिस कितनी तत्पर है? सामूहिक नरसंहार बीते दिनों की बात हो गयी। सांप्रदायिक सौहाद्र्र बरकरार है। जाति के बदले सिर्फ विकास की बात होती है। वित्तीय प्रबंधन को सुधारा गया। हमार काम को योजना आयोग भी सराह रहा है।ड्ढr आप पर समाज को बांटने के आरोप लगते हैं ?ड्ढr हम बांटने में नहीं, जोड़ने में विश्वास रखते हैं। दलितों में भी हाशिए पर खड़े लोगों को मौका दिया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता उन समूहों को सशक्त बनाना है जिन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता। क्या बाढ़पीड़ितों को राहत या बच्चियों को साइकिल और पोशाक देने में कोई भेदभाव किया गया? जाति और धर्म के आधार पर किसी को वंचित नहीं किया जा रहा है।ड्ढr केन्द्र से कितनी सहायता मिलती है?ड्ढr हमारे मंत्री दिल्ली जाते हैं। तीन दिनों के इंतजार के बाद भी केन्द्रीय मंत्री मुलाकात नहीं करते। कोसी पुनर्वास के लिए 14 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव गया। अब तक कोई सहायता नहीं मिली। जबकि प्रधानमंत्री ने कोसी क्षेत्र की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया। सीआरएफ कानून के तहत कृषि भूमि सुधार के लिए 6 हजार रुपये प्रति हेक्टयर राशि का प्रावधान है। हमने अधिक राशि की मांग की, वह भी नहीं मिली। राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत केन्द्र की जिम्मेदारी है। बिहार में हमें अपने बजट से 400 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेे। हम चाहते हैं कि केन्द्रीय करों में राज्यों का हिस्सा बढ़े। खासकर गरीब राज्यों का। हम 13 वें वित्त आयोग के सामने अपनी मांग रखेंगे।ड्ढr राजद के बार में क्या कहेंगे?ड्ढr राजद के रूप में गैर-जिम्मेदार विपक्ष मिला है। हमें इसका राजनीतिक रूप से लाभ ही है। हमने सहकारिता क्षेत्र में व्यापक सुधार की शुरूआत की तो लालू उसे काला कानून बताने लगे। क्या दलितों, गरीबों, महिलाओं और दबे-कुचले वर्ग को मजबूत नहीं होना चाहिए।? अच्छी बात है कि लालू प्रसाद भी आजकल विकास की बात कर रहे हैं। यह हमारा ही प्रभाव है।ड्ढr और रामविलास पासवान..ड्ढr पासवान जी के बार में हम कुछ नहीं कहेंगे। वह हमेशा विकास की बात करते हैं। पांच साल तक लालू प्रसाद के खिलाफ बोलते हैं। फिर उन्हीं की शरण में चले जाते हैं। इंडिकेशन तो ऐसा ही है कि इसबार भी वह उधर ही जायेंगे। हम पासवान जी का व्यक्ितगत रूप से बहुत सम्मान करते हैं लेकिन उनसे कोई राजनीतिक बातचीत नहीं होती।ड्ढr सरकार के कमकाज से संतुष्ट हैं?ड्ढr हम संतुष्ट हो गये तो सारा काम ठहर जायेगा। राज्य के विकास के लिए बैचेन रहना जरूरी है। तभी तो टीम के लोग भी बेचैन रहेंगे।ड्ढr कभी अफसोस भी होता है?ड्ढr मैं अफसोस करने वाला शख्स नहीं। मुझे जो करना है, वहीं करता हूं। यह सोच कर अफसोस नहीं करता कि यह काम करना था लेकिन नहीं कर पाया। हां जिस तेजी से चीजों को अमल में लाना चाहता हूं, उतनी तेजी से काम हो नहीं रहा। इसीलिए तो सिस्टम को सुधारने पर सबसे अधिक जोर है।ड्ढr भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही हैं। ड्ढr डीजीपी, सचिव, डीएम और चीफ इंजीयिनर तक को दबोचा गया है। भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए इंस्टीट्यूशनल एरंजमेंट जरूरी है। इस पर काम हो रहा है।ड्ढr निवेश की क्या स्थिति है?ड्ढr विश्व बैंक ने बड़े पैमाने पर मदद दी है। सड़क निर्माण में एशियन डेवलपमेन्ट बैंक और प्रशासनिक सुधार के लिए डीएफआईडी ने सहायता दी है। बुद्धिस्ट सर्किट के लिए जेबीआईसी आगे आया है। गन्ना और मकई से इथेनॉल बनने के क्षेत्र में जबरदस्त आकर्षण है लेकिन केन्द्र सरकार ने ही मामला अटका दिया। जहां तक चीनी मिलों की बात है, तो विश्वस्तर पर अधिक उत्पादन के कारण प्रक्रिया कुछ धीमी हो गयी है। पर नयी मिलें तो खुलेंगी ही। कुछ निवेशक खुद जमीन की व्यवस्था कर रहे हैं।ड्ढr और बिजली के क्षेत्र में?ड्ढr बिजली का मामला थोड़ा जटिल है। बिजली क्षेत्र में कम से कम दो-तीन वर्ष के बाद ही काम नजर आता है। नबीनगर में एनटीपीसी के साथ मिलकर हम 2000 मेगावाट का नया बिजली घर लगा रहे हैं। निजी क्षेत्र भी बिजलीघर लगाना चाहता हैं। लेकिन उनके सामने कोल लिंकेज की समस्या है।ड्ढr जन प्रतिनिधियों में असंतोष की बात उठती है?ड्ढr कभी कभार ऐसी शिकायतें आती है। हम ऐसे बयानों या खबरों को नजरअंदाज नहीं करते। अफसरों को स्पष्ट हिदायत दी गयी है कि जनता और जन प्रतिनिधियों का सम्मान होना चाहिए।

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  • Web Title: विशेष साक्षात्कार