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पूंजीवाद के कारण आर्थिक मंदी

विश्व वित्तीय संकट का मुख्य कारण पूंजीवाद है। यह संकट वैश्वीकरण के वर्तमान दौर की उपज है। वैश्वीकरण ने आर्थिक मुद्दों पर जोर तो दिया लेकिन इसने सामाजिक मुद्दों की उपेक्षा की। ज्ञानचंद समाजवादी अध्ययन संस्थान में पूंजीवाद का वर्तमान संकट और समाजवाद विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए इंटरनेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ लेबर स्टडीा, जेनेवा के पूर्व निदेशक डा. जेरी रोर्स ने कहा कि वर्तमान वैश्वीकरण का नैतिक व आदर्शवादी आधार कमजोर है।ड्ढr डा. रोर्स ने कहा कि वैश्वीकरण ने समानता की बात कभी नहीं की। गरीबी व बेरोगारी की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। पूंजी के निर्बाध अंश को विश्व में कहीं भी जाने की तो क्षाजत दे दी गयी है लेकिन श्रम के कहीं भी जाने पर रोक है। उन्होंने कहा कि अब पूंजीवाद को संकट से उबारने के लिए उसे अपने में मौलिक सुधार लाना होगा। सामाजिक उद्देश्यों को पूंजीवाद में शामिल करना होगा। इसके लिए वैश्विक नियंत्रण की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने संकट से मुक्त होने के लिए ग्लोबल पॉलिटिकल गवर्नेस की परिकल्पना को साकार करने पर जोर दिया। साथ ही डा. रोर्स ने कहा कि सामाजिक उद्देश्यों को पूरा कर पूंजीवाद समाजवाद के भी करीब पहुंचेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. एनके चौधरी ने कहा कि पूंजीवाद के समक्ष व्यापक संकट उत्पन्न हो गया है। इसका असर व्यापक, गहरा व लंबा होगा। इससे भारत भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। पूंजीवाद इस संकट से उबर पाएगा इसमें संदेह है। प्रो. चौधरी ने कहा कि पूंजीवाद का खात्मा होगा और इसकी कब्र पर समाजवाद का फसल लहलहाएगा। कार्यक्रम में जेनी रोर्स, प्रो. बच्चू सिन्हा, प्रो. एलएन शर्मा, प्रो. लालबहादुर सिंह, प्रो. घनश्याम नारायण सिंह, डा. सुधीर कुमार, प्रो. परमानंद सिंह, उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी समेत बड़ी संख्या में बुद्धिाीवि मौजूद थे।ं

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