DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नक्सलबाड़ी आंदोलन ने नवजागरण को नई जमीन दी : आलोक धन्वा

कवि आलोक धन्वा ने कहा है कि बिहार में नक्सलवाड़ी आंदोलन ने नवजागरण को नई जमीन व मुहावर दिए हैं। उनके अनुसार सूबे में नवजागरण के सवाल को 70 के दशक में भोजपुर समेत पूर मध्य बिहार के जिलों में शुरू हुए वर्ग संघर्ष से अलग करके नहीं समझा जा सकता है। इस आंदोलन ने राज्य के सामंती समाज के मूल्यों पर सीधा चोट किया और देशभर के साहित्य में भी बड़े बदलाव लाये।ड्ढr ड्ढr उनकी राय में जनसंहारों व कत्लेआमों से नवजागरण को रोका नहीं जा सकता है। श्री धन्वा ने भाकपा(माले) के मुखपत्र लोकयुद्ध की ओर से रविवार को माध्यमिक शिक्षक संघ भवन में अशोक कुमार की स्मृति में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं। हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक डा. खगेन्द्र ठाकुर ने कहा कि बिहार में नवजागरण आज भी जारी प्रक्रिया है। इसे इतिहास के निर्माण में जनता की भूमिका, ज्ञान -विज्ञान के प्रभाव व व्यक्ित की बौद्धिक स्वतंत्रता की चाहत के रूप में देखा जा सकता है। कथाकार शेखर ने कहा कि वर्ग विभाजित समाज में सत्ता संवेदनहीन होती है और इससे कोई उम्मीद करना भी बेमानी है। इस मौके पर पत्रकार श्रीकांत, लोकयुद्ध के संपादक बीबी पांडेय, पुष्पराज व रामजी राय ने भी अपने विचार रखे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: नक्सलबाड़ी आंदोलन ने नवजागरण को नई जमीन दी : आलोक धन्वा