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वन्यजीवों को बचाने दौड़ पड़ता है वह

घर-मुहल्ले में कोई सांप निकलता तो लोग जंहा डंडे लेकर उसे मारने पहुंचते वहीं सत्यप्रकाश उसे बचाने के लिये दौड़ पड़ता। डेढ़-दो साल पहले खेल-खेल में शुरू हुआ यह अभियान इस कदर परवान चढ़ा कि सत्यप्रकाश के जुनून के कायल आम लोग भी उसके इस अभियान से जुड़ने लगे हैं। बदलाव की यह बयार बहाने वाले पशुप्रेमी सत्यप्रकाश की पहचान अब तो राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चली है।ड्ढr उन्हांने अबतक दर्जनों जहरीले सांपों, जसे- कोबरा, वाइपर, वूल्फ स्नेक, वाटर स्नेक, अजगर, विलुप्तप्राय श्रेणी वाले मॉनीटर लिजार्ड, क्रो-पेजेंट, माहूक आदि की जान बचाकर विभाग को सौंपा है। इस दौरान वह, अचानक निकलने वाले इन जीवों की रक्षा का मंत्र लोगों में बांटना नहीं भूलते। अपने पशुप्रेम को मंजिल तक पहुंचाने के लिये उन्होंने नियो ह्यूमन फांउडेशन की स्थापना की है। उसके बाद तो घरों में बांध कर रखे गये मोर, हिरण और अन्य जंगली जीवों को भी उन्होंने मुक्त कराया। सत्यप्रकाश का पशुप्रेम कोसी के कहर के वक्त भी खूब दिखा। राज्य से उनकी संस्था अकेली थी जिसने वहां पहुंचकर हाारों जानवरों को बाढ़ से बचाया। विलुप्त हो रहे गिद्धों और चमगादड़ों के प्राकृतिक बसेरों की खोज की और विदेशी सैलानी पक्षियों को बचाने का अभियान शुरू किया। इसके लिये उन्होंने डायक्लोफेनिक के इस्तेमाल नहीं करने की आवाज भी बुलंद कर रखी है।ड्ढr उनका यह अभियान हाारीबाग, रांची, कोडरमा, चतरा समेत कई जिलों में चल रहा है। सत्यप्रकाश की संस्था राज्य में अकेली है जिसे बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी सहित इंडियन बर्ड कांरव्रेशन नेटवर्क, वाइल्ड लाइफ की इमरोंसी रिलीफ नेटवर्क की सदस्यता मिल चुकी है।

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