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काशी में सीखे तंत्र विद्या से यूरोप में करेंगे कमाई

ाशी में सोमवार को एक और विदेशी ने तंत्र विद्या के शक्ित मंत्र की दीक्षा ली। स्विट्Êारलैंड निवासी रमी वागनर ने संस्कृत तथा कुंडलिनी योग के प्रकांड विद्वान डॉ. भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ से शिवाला स्थित उनके आवास पर पूरे विधि-विधान के साथ दस महाविद्याओं में प्रमुख काली मंत्र की दीक्षा प्राप्त की। इस मौके पर उन्हें नया नाम ‘रामानंदनाथ’ दिया गया। खास यह कि रमी अब तक गुप्त और रहस्यमय मानी जाने वाली तंत्र विद्या का प्रयोग कारोबार में करंगे। बीते 17 नवंबर को सोमवार को स्पेन निवासी रूसी बाला ओल्गा रÊाूमोविच ने डॉ. वागीश से ही सात्विक मार्ग में मोक्ष प्राप्ति व आध्यात्मिक विकास के उद्देश्य से तंत्र साधना की भैरवी दीक्षा ली थी। शिवतत्व से संबद्ध उस दीक्षा के बाद ओल्गा का नामकरण ‘चिन्मयी मां’ हुआ था। आज के आयोजन में डॉ. वागीश के आचार्यत्व में पं. शंभूनाथ पांडेय ने करीब साढ़े तीन घंटे तक अनुष्ठान कराया। विभिन्न कंपनियों के सलाहकार रमी ने दीक्षित होने के बाद मीडिया को बताया, भारतीय संस्कृति में पूर्णत्व है। यह दीक्षा लेने का मेरा मुख्य उद्देश्य यह है कि मैं इसके जरिए खुद की कार्यकुशलता बढ़ाते हुए अपने प्रोफेशन में भी इस विद्या का प्रयोग करूं। निश्चित ही मेर क्लाइंट्स इस विद्या से लाभान्वित होंगे। रमी ने डॉ. वागीश की संस्था वाग्योगचेतनापीठम् की एक शाखा स्विट्Êारलैंड में ‘वाग्योग एसोसिएशन ऑफ यूरोप’ के नाम से स्थापित की है। सन् 2004 से वह डॉ. वागीश के संपर्क में रहते हुए संस्कृत व तंत्र विद्या सीख रहे हैं।

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