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जसा सवाल, वैसा ही दिया जवाब

सरकार के तीन साल पूरा होने के मौके पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूर मूड में थे। अपनी बात कहने के बाद उन्होंने पत्रकारों को सवाल पूछने के लिए आमंत्रित किया। अंदाज वही-ौसा सवाल, वैसा ही जवाब। एक सवाल आया कि राजद के पोस्टर में आपने अपनी तस्वीर देखी है? जवाब था-छोटे भाई की ऐसी तस्वीर है तो बड़े भाई(रलमंत्री लालू प्रसाद ) की तस्वीर कैसी होगी। कल्पना कीािए। (राजद के पोस्टर में मुख्यमंत्री के फोटो पर दो सींग लगाए गए हैं। आंखें बड़ी-छोटी हैं और मुंह से पानी निकल रहा है।)ड्ढr ड्ढr एक सवाल आया कि पूरी रिपोर्ट कार्ड में संस्कृतिकर्मियों, कलाकारों और पत्रकारों के लिए कुछ भी नहीं है। मुख्यमंत्री ने सवाल करनेवाले पत्रकार को इतनी जल्दी रिपोर्ट पढ़ने के लिए बधाई दी। कहा कि अगली रिपोर्ट कार्ड में वे इस गड़बड़ी को दूर कर लेंगे। सवाल आया कि बिहार में जीडीपी और पर कैपिटा इनकम में क्या वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने सवाल पूछनेवाले पत्रकार से कहा-हम आपकी अध्यक्षता में इस चीज की जांच के लिए एक कमिटी बना देंगे। तीन साल में ऐसा आपने क्या किया जो नहीं करना चाहते थे? कुमार का जवाब था-अबतक ऐसी नौबत नहीं आई है। तीन साल के कामकाज पर मुख्य विपक्षी दल राजद की ओर से जारी रिपोर्ट कार्ड के बार में मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की-15 साल के अपने कामकाज पर उन्होंने(राजद) कभी रिपोर्ट जारी नहीं की। अब मेर तीन साल के कामकाज पर रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। समझ लीजिए कि उन्हें भी मैने काम करने का अवसर दिया। अब वे काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर एक सवाल आया-कहीं यह मजाक तो नहीं है? कुमार का जवाब था-अगर आपका सवाल मजाक हो तो ठीक है। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य बैठे थे। एक सवाल उछला कि इनमें से सबसे कमजोर कौन हैं? जवाब: सभी छात्र पास हैं। बाढ़ग्रस्त जिलों का होगा अध्ययनड्ढr पटना (हि. ब्यू.)। राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय कोसी क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित जिलों का अध्ययन करगा। इसके लिए कुलपति की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। कमेटी में सभी विषयों के सात विशेषज्ञ भी रखे गये हैं।ड्ढr आरएयू के कुलपति मेवालाल चौधरी ने सोमवार को पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कमेटी उन इलाकों की मिट्टी के स्वरूप में आये बदलाव की जांच करगी। वैज्ञानिक किसानों से भी बात कर उनकी समस्याओं को जानेंगे।ड्ढr कमेटी पंद्रह से बीस दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को दे देगी। सरकार को किसानों के लिए उपयोगी सलाह भी दिये जाएंगे। वैज्ञानिक यह भी देखेंगे कि कौन सी फसल वहां अब उगाई जा सकती है। मत्स्यपालन की संभावनाओं पर भी विचार किया जायेगा। चार दिन पहले कुलपति का पद संभालने वाले श्री चौधरी ने बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता विश्वविद्यालय के सभी संस्थानों को किसानोपयोगी बनाना है। शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं को भी वे गंभीरता से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी कृषि विकास के रोड मैप को सरमीं पर उतारने का वे हर संभव प्रयास करंगे। इसके लिए हर प्रकार के बीज किसानों को उपलब्ध कराने के लिए उसका उत्पादन बढ़ाया जायेगा।

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