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बुलंद हौसलों को थामना आसान नहीं

भारत को भारत में हराना कितना कठिन काम है, कटक तक पहुंचते-पहुंचते अंग्रेज कप्तान केविन पीटरसन को यह बात अच्छी तरह समझ में आ गई होगी। एंटीगुआ में मिलियन डालर ट्वेंटी-20 व मुंबई में अभ्यास मैच को जोड़ दिया जाए तो लगातार छह हार के सदमे में है टीम इंग्लैंड। दक्षिण अफ्रीका को 4-0 से हराने का उसका नशा काफूर हो चुका है। अब तक केपी की सेना ग्रीनपार्क में ही टीम इंडिया को हल्की टक्कर दे सकी है। पीटरसन चाहकर भी टीम में जीत का जज्बा नहीं पैदा कर पा रहे हैं। अभी तीन वन डे बाकी है इसलिए मेहमानों का मकसद हार के अंतर को कम करना होगा। मेहमानों की सबसे बड़ी दिक्कत पॉल कोलिंगवुड व जिमी एंडरसन का फ्लॉप होना है। कोलिंगवुड अच्छे फिनिशर माने जाते हैं। वह स्पिन भी अच्छा खेलते हैं लेकिन अब तक उनके बल्ले से रन नहीं निकले हैं। दूसरी ओर एंडरसन का स्विंग गायब है। 2005-06 के भारत दौर में इंग्लिश टीम को 5-1 से वन डे सीरीज में शिकस्त झेलनी पड़ी थी। कम से कम उस दंश को दोहराने से मेहमान बचना चाहेगी। दूसरी ओर भारत बाकी बचे मैचों को नई सीरीज के तौर पर देख रहा है। कोच गैरी कर्स्टन ने साफ कर दिया है कि इस सीरीज को दो भागों में खेला जाए। टीम इंडिया सात मैचों की सीरीज में 4-0 की अजेय लीड के साथ हीरो होंडा कप पहले ही ले उड़ी है। अब सीरीज के अगले चरण में तीन मैचों के लिए नई रणनीति बनाई गई है। टीम प्रबंधन का मानना है कि अंग्रजों पर कसे गए शिकंजे को ढीला नहीं करना है, क्योंकि सीरीज में अभी काफी क्रिकेट खेली जानी है। धोनी ने संकेत दिए हैं कि अगले तीन मैचों में रिजर्व खिलाड़ियों को मौका दिया जाएगा। इस कड़ी में यहां दिन-रात के मैच में जहीर खान को आराम देकर इरफान पठान अंतिम लाइन अप में शामिल किए जा सकते हैं। धोनी की कप्तानी में पठान ने 31 एक दिनी मैचों में 42.33 की औसत से 33 विकेट लिए हैं। लेकिन श्रीलंका के खिलाफ वन डे सीरीज में इरफान का प्रदर्शन अच्छा नहीं था। वह तीन मैचों में एक विकेट ही झटक सके थे। बड़ौदा के इस सीमर ने रणजी के मौजूदा सत्र के दो मैचों में 12 विकेट लेकर दोबारा टीम में वापसी करने में कामयाबी पाई है। दिल्ली के विराट कोहली के लिए भी दरवाजे खुल सकते हैं। प्रज्ञान ओझा को मौका मिलेगा या नहीं यह टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करगा। चूंकि पार्ट टाइम स्पिनर्स (युवराज, युसूफ व सहवाग) अच्छा कर रहे हैं ऐसे में ओझा के लिए अंतिम 11 में शामिल होना आसान नहीं होगा। अगर टीम प्रदर्शन की बात की जाए तो इंग्लैंड के मुकाबले भारत कहीं आगे खड़ा है। सहवाग, गंभीर व युवराज मैदान में रनों का अंबार लगा रहे हैं। गेंदबाज भी अंग्रजों को खुलकर खेलने की आजादी नहीं दे रहे हैं। मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर टीम में लौट आए हैं। बेंगलुरु में उन्होंने 21 गेंदों में 11 रन बनाए। कटक में उनकी मौजूदगी को लेकर तो कोई संदेह नहीं है लेकिन बल्लेबाजी क्रम में उनके सही जगह के चुनाव को लेकर पशोपेश की स्थिति अब भी है। गत आठ महीनों में वन डे में सचिन की गैरमौजूदगी में सहवाग व गौतम की जोड़ी ने कई गंभीर पारियां खेली हैं। गंभीर ने बेंगलुरु में वन डाउन उतरकर भी अपने फार्म की बानगी दिखा दी है। बाराबती स्टेडियम में 22 महीने के बाद अंतरराष्ट्रीय मैच का आयोजन हो रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ 2002 में यहां खेले गए पिछले मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा था। तब कप्तान सौरभ गांगुली थे। इससे पहले 1में गावसकर की कप्तानी में भारत यहां इंग्लैंड को हरा चुका है।

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