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संघर्ष से जो मिले उसका अलग मजा

हां तो फिल्मी चमक-दमक और कहां भीड़ में शामिल एक-एक आदमी को नजर भरके देखने की चाहत। अपनी छवि को खुदसे तोड़ते तथा नई छवि बनाते शेखर सुमन। लोगों से समर्थन की अपील। अपनापा दिखलाने का हर जतन। शेखर चुनावी जंग को बहुत ही सीरियसली ले रहे हैं। गुरुवार को सुबह देर से खुली उनकी नींद। पटना की बिजली व्यवस्था ने आखिर उन्हें अपनी असलियत दिखला ही दी थी। बुधवार को बख्तियारपुर-फतुहा के गांवों का सघन दौरा कर देर रात लौटे भी थे। बताते हैं कि सात-आठ किलीमीटर पैदल भी चल चल लिए थे। थकान तो थी पर लोहानीपुर स्थित अपने घर लौटे तो कार्यकर्ताओं की विभिन्न कमेटियों के साथ बेहतर मैनेजमेंट को लेकर बातचीत को बैठ गये।ड्ढr ड्ढr दो बजे रात को बिस्तर पर पहुंचे कि बिजली चली गयी। सुबह पांच बजे आयी। फिर गयी, फिर आयी। सात बजे से रोड शो के लिए कार्यकर्ताओं का हुजूम जम चुका था। कुछ देर बाद जगे। फ्रश होकर तुलसी चउरा में जल डाला। मां उषा प्रसाद, पत्नी अल्का सुमन और बालीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्षरत अभिनेता पुत्र अध्ययन के साथ शेखर बाबूजी (फणीभूषण प्रसाद) के पास केक और रसगुल्लों के साथ पहुंचे। बाबूजी 80 वर्ष के हो गये। केक कटे, मिठाइयां बंटीं। सबने मिलकर गाना गाया-तुम जियो हजारों साल..। कार्यकर्ताओं ने भी नाश्ता किया। फिर बजे शुरू हुआ खुली गाड़ी में रोड शो। पत्नी और बेटा अध्ययन भी साथ हो लिए। भूतनाथ रोड में कांग्रस नेता रामजतन सिन्हा भी शामिल हुए। पहले हाफ में काफिला कांटी फैक्ट्री, मुन्नाचक, दिनकर चौक, गोविंद मित्रा रोड, रमना रोड, अशोक राजपथ, इंजीनियरिंग कालेज मोड़, भिखना पहाड़ी, सैदपुर में रोड शो-छोटी सभाएं-लोगों से एक मौका देने की अपील। शेखर-अध्ययन और अल्का सुमन के अपने-अपने अंदाज। लोगों के स्नेह को देखकर शेखर ने दुष्यंत की वह पंक्ितयां सुनाईं-कौन कहता है आसमान में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों। गर्मी बढ़ती गई। सूर्य अब सीधे सिर पर विराजमान हो गये।ड्ढr ड्ढr शेखर ने कहा -यही जिंदगी है। हमेशा कोई रास्ता आसान नहीं रहता। जूझके-संघर्ष करके जो मिले, उसका दोगुना मजा है। मेरी पत्नी और बेटे को हैरत हुई कि कैसे मैं ये कर पा रहा हूं। पर, समय इतना कम है और इतने अधिक लोगों से मिलना है कि धूप-हवा-गर्मी बाधा डाल ही नहीं सकती। अल्का कहती हैं उन्हें भरोसा है कि लोग इन्हें एक मौका जरूर देंगे। काफिला लोहानीपुर लौट गया है। दोपहर के भोजन के बाद कुछ देर के लिए खामोश हो गया शेखर का आवास। फिर चार बजे के आसपास चहल-पहल शुरू हुई और शेखर निकल पड़े करबिगहिया की ओर। पासवान टोली, चिड़ैयाटांड़, चांदमारी रोड, पोस्टलपार्क, रामलखन पथ, द्वारिका कालेज, अशोक नगर, मलाहीपकड़ी, हनुमाननगर और कंकड़बाग की कई सड़कों से लोगों से मिलते-जुलते शेखर फिर देर रात थक-हार कर कार्यकर्ताओं के साथ घर पहुंचे। जुट गये विभिन्न कमेटियों के साथ विमर्श में। बिस्तर पर जाने पर भी शुक्रवार के कार्यक्रमों की प्लानिंग।

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