अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चीन की ओर झुक सकता है अमेरिका

बराक ओबामा के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद भारत-अमेरिकी रिश्तों की दशा क्या होगी? विदेश नीति विशेषज्ञों के अलग-अलग विचार हैं। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र का कहना है कि अमेरिका इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से ग्रस्त है। इससे निपटने के लिए अमेरिका को चीन की मदद चाहिए। इसलिए वह चीन की ओर झुक सकता है। अर्थव्यवस्था ठीक से चले इस पर ओबामा का सबसे अधिक जोर होगा क्योंकि अगर चार साल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जान नहीं आई तो उनका फिर राष्ट्रपति चुना जाना संभव नहीं होगा। यह राय उन्होंने यहां ओब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में एक परिचर्चा के दौरान व्यक्त की। अमेरिका में राजदूत रहे ललित मानसिंह का कहना है कि ओबामा भारत-विरोधी तो नहीं होंगे, लेकिन वे जार्ज बुश जसा दोस्ताना रुख भी नहीं रखेंगे। उनका मानना है कि बेशक बुश ने भारत-अमेरिकी रिश्ते अच्छे करने वाले का नाम कमाया, लेकिन इसकी प्रमुख वजह यह थी कि पेंटागन और सीआईए ने अपने अध्ययनों से पाया कि भारत एसा देश है, जो शांति और युद्ध दोनों में ही बाजी पलटवा सकता है। मानसिंह के अनुसार चीन को ही अमेरिका खतरा मानता है क्योंकि उसी के पास इस किस्म की सैनिक और आर्थिक ताकत होगी। अमेरिका इसलिए संतुलन के लिए भारत से दोस्ती को जरूरी मानता है। लेकिन भारत के लिए अमभी ेरिका से दोस्ती बनाये रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं। इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीा एंड एनालिसीज के सीनियर फेलो सुजीत दत्ता का मानना है कि भारत-अमेरिकी एटमी करार से चीन खुश नहीं था, लेकिन जब देखा कि सब इसका समर्थन कर रहे हैं, तो उसने इस मसले पर अलग-थलग पड़ जाना ठीक नहीं समझा। अब वह खुद को नई हकीकत के अनुरूप ढालने में लगा है। जनरल वीपी मलिक का कहना है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इस एटमी करार से भारत को सचमुच में कितना फायदा होगा। यह समय बताएगा कि वास्तव में भारत को हाई टेकनोलॉजी मिलती है या नहीं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: चीन की ओर झुक सकता है अमेरिका