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फिटमेंट कमेटी-सरकार के रवैये पर उठ रहा सवाल

राज्य सरकार द्वारा वेतनमान तय करने में की गयी गलतियों को दबाने की कोशिशें एक बार फिर तेज हो गयी हैं। सरकार से लेकर अधिकारियों का एक तबका वेतन विसंगति के मामले में फिटमेंट कमेटी को सही स्थिति बताने से कतरा रहा है।ड्ढr कमेटी ने राज्य सरकार से पूछा था कि वर्ग दो के कुछ संवर्गो का वेतनमान कैसे बढ़ा दिया गया। राजपत्रित संवर्गों में जिनका वेतनमान 6500 से बढ़ाकर 8000 रुपये नहीं किया गया, इसका आधार क्या था। एक माह बाद भी फिटमेंट कमेटी को सरकार ने जवाब नहीं दिया है। कुछ कैडर का मनमाने तरीके से वेतनमान बढ़ाये जाने के जिम्मेवार अधिकारी ही फिटमेंट कमेटी में महत्वपूर्ण पद पर हैं। सरकार में भी ये कामकाज देखते हैं। कमेटी जो जानकारी मांग रही है, वे सभी जानकारी उक्त पदाधिकारी के पास है। जवाब भेजने का काम भी सरकार में वही देख रहे हैं। एक ओर राज्य सरकार फिटमेंट कमेटी को यह निर्देश देती है कि पूर्व में जिनका वेतनमान कम या अधिक हो गया है, उसको आधार बनाने के बजाए सही वेतनमान के मुताबिक नये वेतनमान की अनुशंसा कर। दूसरी ओर जब इस बिंदु पर सरकार से कमेटी जवाब मांगती है, तो उपलब्ध नहीं कराती। उल्टे कमेटी के सदस्य सचिव अपने अध्यक्ष एवं राज्य सरकार को पत्र लिखकर कमेटी के कार्यकलाप पर सवाल उठाने लगे हैं।ड्ढr सूत्रों का कहना है कि वेतमान विसंगति की गड़बड़ियों से ध्यान बंटाने के लिए इस तरह से दबाव बनाया जा रहा है। कमेटी यदि राज्य सरकार द्वारा दिये गये वेतनमान के आधार पर नये वेतन की अनुशंसा करती है, तो वेतन विसंगति का मामला समाप्त होने के बजाए और बढ़ेगा ही। जिन पदों को समानता के आधार पर बढ़े हुए वेतनमान की अनुशंसा यदि कमेटी नहीं करती है, तो उनकी स्थिति और कमजोर होगी। 15 दिसंबर तक कमेटी को रिपोर्ट सौंपनी है। वर्तमान स्थिति में यदि समय पर रिपोर्ट तैयार की जाती है, तो वह विसंगतियों से भरी होगी। ं

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