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राज्य में बेहतर संभावना होने के कारण बिहार के किसानों को समृद्ध बनाना है तो मशरूम की खेती को बढ़ावा देना चाहिए। कोसी के पुननिर्माण में तो यह जबरदस्त सहायक होगी। मशरूम के लिए देश की सबसे बड़ी संस्था एनआरसीएम, सोलन (हिमाचल प्रदेश) के निदेशक डा. आर पी तिवारी ने मंगलवार को पटना में यह फार्मूला दिया। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती के लिए अलग से जमीन की जरूरत नहीं होती है। इनडोर खेती होने के कारण महलाएं भी इसमें रुचि ले सकती हैं।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एआईआर मीठापुर में उत्पादकों के प्रशिक्षण और मशरूम के बीज (स्पान) बनाने की जो व्यस्था की है उससे लगता है कि सरकार की कृषि में समझ भी गहरी है और रुचि भी। डा. तिवारी ने कहा कि मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने से समृद्धि तो आयेगी ही एग्री वेस्ट का बेहतर उपयोग भी होगा। एक किलो पुआल से एक किलो मशरूम का उत्पादन होगा उसके बाद बचे लगभग दो सौ ग्राम कचर का उपयोग रसायनिक खाद में किया जा सकता है। लागत दस से पंद्रह रुपये आयेगी और तैयार माल बिकेगा 50 से 80 रुपये किलो। इसे पार्ट टाईम खेती के रूप में भी अपनाया जा सकता है। 20 दिन में ही उत्पादन शुरू हो जाता है। राज्य में मशरूम प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डा. अरविन्द कुमार ने बताया कि वे अब तक लगभग आठ सौ किसानों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। उनमें 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। 57 प्रतिशत लोगों ने खेती शुरू कर दी है। लगभग दस प्रतिशत तो बड़े उत्पादक बन गये हैं। इस अवसर पर मशरूम की खेती का विस्तार करने में जुटे कृष्णा प्रसाद भी मौजूद थे।ड्ढr ड्ढr अपीलीय प्राधिकार के सदस्य मनोनीतड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। मानव संसाधन विकास विभाग ने बाकी बचे पांच जिलों के लिए भी शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार के सदस्यों को मनोनीत कर दिया है। ये सभी रिटायर अधिकारी होंगे। इनमें पहले कटिहार के लिए अधिसूचित उमाकांत श्रीवास्तव को अब बक्सर का सदस्य बनाया गया है। बिहार न्यायिक सेवा के अधिकारी रहे दयानन्द प्रधान को कटिहार, बिहार शिक्षा सेवा के शिवनन्दन प्रसाद सिन्हा को नवादा और घमंडी राम को औरंगाबाद जिले का सदस्य मनोनीत किया गया है। पहले औरंगाबाद जिले के लिए अधिसूचित शिवदास पांडेय को सारण जिला का सदस्य बनाया गया है। इन सभी को 30 नवम्बर तक ज्वाइन कर लेने को कहा गया है। इससे पहले सूबे के सभी 38 जिलों के लिए कुल 40 सदस्यों को मनोनीत किया गया था। इनमें पटना और गया के लिए दो-दो सदस्य हैं। कुछ सदस्य विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा में ज्वाइन नहीं कर पाए थे। उनकी जगह पैनल के अन्य सदस्यों को मौका दिया गया है। विभाग ने प्राधिकार के लिए 50 सदस्यों का पैनल तैयार कर रखा है। आवेदन पत्रों की बड़ी संख्या के मद्देनजर कुछ और जिलों में सदस्यों की तादाद बढ़ाई जा सकती है। शिक्षक बहाली के अभ्यर्थी विभाग द्वारा अपनी शिकायतों के निराकरण से संतुष्ट नहीं होने पर प्राधिकार में अपील कर सकते हैं।

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